Gay Hindi sex story – भाभी के भाई


Click to Download this video!

मैं हूँ मंगल. आज मैं आप को हमारे खानदान की सबसे राज़  की बात बताने जा रहा हूँ.हम सब राजकोट से पचास किलोमीटर दूर एक छोटे से गाँव में ज़मीदार हैं.मेरे माता-पिताजी जब मैं दस साल का था तब मर गए थे. मेरे बड़े भैया काश राम ने मुझे पाल पोस कर बड़ा किया.कहानी कई साल पहले की उन दिनों की है जब मैं अठारह साल का था और मेरे बड़े भैया, काशी राम शादी करने की सोच रहे थे.
भैया मेरे से तेरह साल बड़े हैं. उनक भैया ने शादी की सुमन भाभी के साथ. उस वक़्त मैं सोलह साल का हो गया था और मेरे बदन मैं फ़र्क पड़ना शुरू हो गया था. सबसे पहले मेरे वृषाण बड़े हो गये. बाद में लोडे पर बाल उगे और आवाज़ गहरी हो गयी.मुँह पर मूंछ निकल आई. लोडा लंबा और मोटा हो गया. रात को स्वप्न-दोष होने लगा. मैं मुठ मारना सिख गया.
सुरेश के साथ उनका छोटा भाई भी हमारे ही घर में रहने आ गया. उसका नाम था सुरेश . सुरेश की बात कुछ और थी. एक तो वो मुझसे चार साल ही बड़ा था. दूसरे, वो काफ़ी ख़ूबसूरत था, या कहो की मुझे ख़ूबसूरत नज़र आता था. उसके आने के बाद मैं हर रात कल्पना किए जाता था और रोज़ उसके नाम की मुठ मार लेता था.
उमर का फ़ासला कम होने से सुरेश के साथ मेरी अच्छी बनती थी,हालांकि मुझे बच्चा ही समझता था. मेरी मौजूदगीमें भी नहाकर निकलते हुए उसका तौलिया खिसक जाता तो वो शर्माता नहीं था. इसी लिए उसके गोरे गोरे लंड को देखने के कई मौक़े मिले मुझे. एक बार स्नान के बाद वो कपड़े बदल रहा था और मैं जा पहुँचा. उस का नंगा बदन देख मैं शरमा गया लेकिन वो बिना हिचकिचाए बोला, ‘दरवाज़ा खटखटा के आया करो.’
दो साल यूँ गुज़र गये. मैं अठारह साल का हो गया था और गांव के स्कूल की 12 वी मैं पढ़ता था. उन दिनों में जो घटनाएँ घटी इस का ये बयान है

बात ये हुई कि मेरी ही उम्र का एक नौकर बसंत, हमारे घर काम पे आया करता था. वैसे मैंने उसे बचपन से बड़ा होते देखा था. बसंत इतना सुंदर तो नहीं था लेकिन चौदह साल के दुसरे लड़कों के बजाय उसके चूतड काफ़ी बड़े बड़े लुभावने थे. पतले कपड़े की बनियान के आर पार उसकी छोटी छोटी निपल साफ़ दिखाई देती थी. मैं अपने आपको रोक नहीं सका. एक दिन मौक़ा देख मैंने उसके लंड को थाम लिया. उसने ग़ुस्से से मेरा हाथ झटक डाला और बोला, “आइंदा ऐसी हरकत करोगे तो बड़े सेठ को बता दूंगा”भैया के डर से मैंने फिर कभी बसंत का नाम ना लिया.
एक साल पहले बसंत अपने रिश्तेदारों के यहाँ चला गया था. एक साल वहीँ रहकर अब वो दो महीनो वास्ते यहाँ आया था. अब उसका बदन भर गया था और मुझे उसको चोदने का दिल हो गया था लेकिन कुछ कर नहीं पता था. वो मुझसे क़तराता रहता था और मैं डर का मारा उसे दूर से ही देख लार तपका रहा था.

अचानक क्या हुआ क्या मालूम, लेकिन एक दिन माहौल बदल गया.
दो चार बार बसंत मेरे सामने देख मुस्कराया . काम करते करते मुझे गौर से देखने लगा मुझे अच्छा लगता था और दिल भी हो जाता था उसके बड़े बड़े चूतड़ों को मसल डालने को. लेकिन डर भी लगता था. इसी लिए मैंने कोई प्रतिक्रिया नहीं दी. वो नखारें दिखता रहा.
एक दिन दोपहर को मैं अपने स्टडी रूम में पढ़ रहा था. मेरा स्टडी रूम अलग मकान में था, मैं वहीं सोया करता था. उस वक़्त बसंत चला आया और रोनी सूरत बना कर कहने लगा “इतने नाराज़ क्यूं हो मुझसे, मंगल ?”
मैंने कहा “नाराज़ ? मैं कहाँ नाराज़ हूँ ? मैं क्यूं होऊं नाराज़?”
उस की आँखों मैं आँसू आ गये वो बोला, “मुझे मालूम है उस दिन मैंने तुम्हारा हाथ जो झटक दिया था ना ? लेकिन मैं क्या करता ? एक ओर डर लगता था और दूसरे दबाने से दर्द होता था. माफ़ कर दो मंगल मुझे.”

इतने मैं उसकी ढीला सा नेकर खिसक गया. पता नहीं अपने आप खिसका या उसने जान बूझ के खिसकाया. नतीजा एक ही हुआ, उसके गोरे गोरे चूतड़ों का चूतड़ों का ऊपरी हिस्सा दिखाई दिया. मेरे लोडे ने बग़ावत की नौबत लगाई.
” उसमें माफ़ करने जैसी कोई बात नहीं है म..मैं नाराज़ नहीं हूँ माफ़ी तो मुझे मांगनी चाहिए.”
मेरी हिचकिचाहत देख वो मुस्करा गया और हंस के मुझसे लिपट गया और बोला, “सच्ची ? ओह, मंगल, मैं इतना ख़ुश हूँ अब. मुझे डर था कि तुम मुझसे रूठ गये हो. लेकिन मैं तुम्हे माफ़ नहीं करूंगा जब तक तुम मेरे लंड को फिर नहीं छुओगे.” शर्म से वो नीचा देखने लगा. मैंने उसे अलग किया तो उसने मेरा हाथ पकड़ कर मेरा हाथ अपने लंड पर रख दिया और दबाए रक्खा.
“छोड़, छोड़ पागल,कोई देख लेगा तो मुसीबत खड़ी हो जाएगी.”
“तो होने दो. मंगल, पसंद आया मेरा लंड ? उस दिन तो ये कच्चा था, छूने पर भी कुछ नहीं होता था. आज मसल भी डालो, मज़ा आता है”
मैंने हाथ छुड़ा लिया और कहा, “चला जा, कोई आ जाएगा.”
वो बोला, “जाता हूँ लेकिन रात को आउंगा.आऊं ना ?”

उसका रात को आने का ख़याल मात्र से मेरा लोड़ा तन गया. मैंने पूछा, “ज़रूर आओगे ?” और हिम्मत जुटा कर उसका लोड़ा छुआ. विरोध किए बिना वो बोला,”ज़रूर आऊँगा.तुम उपर वाले कमरे में सोना. और एक बात बताओ, तुमने किसी लड़के को चोदा है ?” उसने मेरा हाथ पकड़ लिया मगर हटाया नहीं.
“नहीं तो.” कह के मैंने लंड दबाया. ओह, क्या चीज़ था वो लंड.उसने पूछा, “मुझे चोदना है ?” सुनते ही मैं चौंक पड़ा.
“उन्न..ह..हाँ”
“लेकिन बेकिन कुछ नहीं. रात को बात करेंगे.” धीरे से उसने मेरा हाथ हटाया और मुस्कुराता चला गया

मुझे क्या पता कि इस के पीछे सुरेश का हाथ था ?

रात का इंतेज़ार करते हुए मेरा लंड खड़ा का खड़ा ही रहा, दो बार मुठ मारने के बाद भी. क़रीबन दस बजे वो आया.
“सारी रात हमारी है .मैं यहाँ ही सोने वाला हूँ “उसने कहा और मुझसे लिपट गया. उसकी  कठोर छाती मेरे सीने से दब गयी.उसके बदन से मादक सुवास आ रहा था. मैंने ऐसे ही उसको मेरी बाहों में जकड़ लिया.
“इतना ज़ोर से नहीं, मेरी हड्डियां टूट जाएगी.” वो बोला. मेरे हाथ उसकी पीठ सहलाने लगे तो उसने मेरे बालों में उंगलियाँ फिरानी शुरू कर दी. मेरा सर पकड़ कर नीचा किया और मेरे मुँह से अपना मुँह टिका दिया.
उसके नाज़ुक होंट मेरे होंट से छूटे ही मेरे बदन मैं झुरझुरी फैल गयी और लोडा खड़ा होने लगा. ये मेरा पहला चुंबन था, मुझे पता नहीं था कि क्या किया जाता है . अपने आप मेरे हाथ उसकी पीठ से नीचे उतर कर चूतड़ पर रेंगने लगे. पतले कपड़े से बनी लुंगी मानो थी ही नहीं. उसके भारी गोल गोल चूतड़ मैंने सहलाए और दबोचे. उसने चूतड़ ऐसे हिलाया कि मेरा लंड उसके पेट साथ दब गया.

थोड़ी देर तक मुँह से मुँह लगाए वो खडा रहा. अब उसने अपना मुँह खोला और ज़बान से मेरे होंट चाटे. ऐसा ही करने के वास्ते मैंने मेरा मुँह खोला तो उसने अपनी जीभ मेरे मुँह में डाल दी. मुझे बहुत अच्छा लगा. मेरी जीभ से उसकी  जीभ खेली और वापस चली गयी.अब मैंने अपनी जीभ उसके मुँह में डाली. उसने होंट सिकोड़ कर मेरी जीभ को पकड़ा और चूसा.मेरा लंड फटा जा रहा था. उसने एक हाथ से लंड टटोला. मेरे लंड को उसने हाथ में लिया तो उत्तेजना से उसका बदन नर्म पद गया. उससे खड़ा नहीं रहा गया. मैंने उसे सहारा दे के पलंग पर लेटाया.
मुसीबत ये थी कि मैं नहीं जानता था कि चोदने में लंड कैसे और कहाँ जाता है ! फिर भी मैंने हिम्मत करके मेरा पाजामा निकल कर उसकी बगल में लेट गया. वो इतना उतावाला हो गया था कि बनियान लुंगी भी नहीं निकाली. फटाफट लुंगी उपर उठाई और जांघें चौड़ी कर मुझे उपर खींच लिया. यूँ ही मेरे हिप्स हिल पड़े थे और मेरा आठ इंच लंबा और ढाई इंच मोटा लंड अंधे की लकड़ी की तरह इधर उधर सर टकरा रहा था, कहीं जा नहीं पा रहा था. उसने हमारे बदन के बीच हाथ डाला और लंड को पकड़ कर अपनी गांड पर डायरेक्ट किया. मेरे हिप्स हिलते थे और लंड गांड का मुँह खोजता था. मेरे आठ दस धक्के ख़ाली गये हर वक़्त लंड का मट्ता फिसल जाता था. उसे गांड का मुँह मिला नहीं. मुझे लगा की मैं चोदे बिना ही झड जाने वाला हूँ.
लंड का मत्था और बसंत की गांड दोनो काम रस से तर बतर हो गये थे. मेरी नाकामयाबी पर बसंत हंस पड़ा . उसने फिर से लंड पकड़ा और गांड के मुँह पर रख के अपने चूतड़ ऐसे उठाए कि आधा लंड वैसे ही गांड में घुस गया. तुरंत ही मैंने एक धक्का जो मारा तो सारा का सारा लंड उसकी गांड में समा गया. लंड की टोपी खिंच गयी और चिकना मत्था गांड की दीवालों ने कस के पकड़ लिया. मुझे इतना मज़ा आ रहा था कि मैं रुक नहीं सका. आप से आप मेरे हिप्स ताल देने लगे और मेरा लंड अन्दर बाहर होते हुए बसंत की गांड को चोदने लगा. बसंत भी चूतड़ हिला हिला कर लंड लेने लगा और बोला, “ज़रा धीरे चोद, वरना जल्दी झड जाएगा.”
मैंने कहा, “मैं नहीं चोदता, मेरा लंड चोदता है और इस वक़्त मेरी सुनता नहीं है”
“मार डालोगे आज मुझे,” कहते हुए उसने चूतड़ घुमाये और गांड से लंड दबोचा. उसके दोनो निप्पल पकड़ कर मुँह से मुँह चिपका कर मैं बसंत को चोदते चला.धक्के की रफ़्तार मैं रोक नहीं पाया. कुछ बीस पचीस तल्ले बाद अचानक मेरे बदन में आनंद का दरिया उमड़ पड़ा. मेरी आँखें ज़ोर से मूँद गयी मुँह से लार निकल पड़ा, हाथ पाँव कड़ गये और सारे बदन पर रोएँ खड़े हो गये. लंड गांड की गहराई में ऐसा घुसा कि बाहर निकलने का नाम लेता ना था. लंड में से गरमा गरम वीर्य की ना जाने कितनी पिचकारियाँ छूटीं.हर पिचकारी के साथ बदन में झुरझुरी फैल गयी .थोड़ी देर मैं होश खो बैठा.

जब होश आया तब मैंने देखा कि बसंत की टाँगें मेरी कमर के आस पास और बाहें गर्दन के आसपास जमी हुई थी.मेरा लंड अभी भी तना हुआ था और उसकी गांड फट फट फटके मार रहा था. आगे क्या करना है वो मैं जानता नहीं था लेकिन लंड में अभी गुदगुदी हो रही थी. बसंत ने मुझे रिहा किया तो मैं लंड निकाल कर उतरा.
“बाप रे,” वो बोला, ” इतना अच्छी चुदाई आज कई दिनो के बाद हुई”
“मैंने तुझे ठीक से चोदा ?”
“बहुत अच्छी तरह से.”
हम अभी पलंग पर लेटे थे. मैंने उसके लंड पर हाथ रक्खा और दबाया. पतले रेशमी कपड़े की बनियान के आर पार उसकी  कड़ी निपपले मैंने मसली. उसने मेरा लंड टटोला और खड़ा पा कर बोला, “अरे वाह, ये तो अभी भी खड़ा है. कितना लंबा और मोटा है मंगल, जा तो, उसे धो के आ.”
मैं बाथरूम मैं गया, पेशाब किया और लंड धोया. वापस आ के मैंने कहा, “बसंत, मुझे तेरा लंड और गांड दिखा. मैंने अब तक किसी की देखी नहीं है”

उसने बनियान लुंगी निकल दी. पाँच फ़ीट दो इंच की उँचाई के साथ साठ किलो वज़न होगा. रंग सांवला, चेहरा गोल, आँखें और बाल काले. चूतड़ भारी और चिकने. सबसे अच्छी थी इसकी छाती.मज़बूत और चौड़ी. छोटी सी निपपले काले रंग के थे. बनियान निकलते ही मैंने दोनो निप्पलों को पकड़ लिया, सहलाया, दबोचा और मसला.

उस रात बसंत ने मुझे गांड दिखाई.मेरी दो उंगलियाँ गांड में डलवा के गांड की गहराई भी दिखाई, जी स्पॉट दिखाया. वो बोला, ” तूने गांड की दिवालें देखी ? कैसी चिकनी है ? लंड जब चोदता है तब ये चिकनी दीवालों के साथ घिस पता है और बहुत मज़ा आता है ”
मुझे लिटा कर वो बगल में बैठ गया. मेरा लंड थोडा सा नर्म होने चला था, उसको मुट्ठी में लिया. टोपी खींच कर मत्था खुला किया और जीभ से चाटा.तुरंत लंड ने ठुमका लगाया और खड़ा हो गया. मैं देखता रहा और उसने लंड मुँह में ले लिया और चूसने लगा. मुँह में जो हिस्सा था उस पर वो जीभ फेरता था, जो बाहर था उसे मुट्ठी में लिए मुठ मारता था. दूसरे हाथ से मेरे वृषाण टटोलता था. मेरे हाथ उसकी  पीठ सहला रहे थे.

मैंने हस्तमैथुन का मज़ा लिया था, आज एक बार गांड चोदने का मज़ा भी लिया. इन दोनो से अलग किस्म का मज़ा आ रहा था लंड चूसवाने में. वो भी जल्दी से एक्साइटेड होता चला था. उसके थूक से लबालब लंड को मुँह से निकल कर वो मेरी जाँघों पर बैठ गया. अपनी जांघें चौड़ी करके गांड को लंड पर टिकया. लंड का मत्था गांड के मुख में फंसा कि चूतड़ नीचा करके पूरा लंड गांड में ले लिया. उसकी  आहें मेरा आहों से मिल गयी.
“उुुुहहहहह, मज़ा आ गया. मंगल, जवाब नहीं तेरे लंड का. जितना मीठा मुँह में लगता है इतना ही गांड में भी मीठा लगता है “कहते हुए उसने चूतड़ गोल घुमाए और उपर नीचे कर के लंड को अन्दर बाहर करने लगा. आठ दस धक्के मारते ही वो थक गया और ढल पड़ा . मैंने उसे बाहों में लिया और घूम के उपर आ गया. उसने टाँगें पसारी और पाँव उधर किया. पोजीशन बदलते ही मेरा लंड पूरा गांड की गहराई में उतर गया. उसकी गांड फट फट करने लगी.

सिखाए बिना मैंने आधा लंड बाहर खींचा, ज़रा रुका और एक ज़ोरदार धक्के के साथ गांड में घुसेड़ दिया.मेरे वृषाण गांड से टकराए. पूरा लंड गांड में उतर गया. ऐसे पाँच सात धक्के मारे. बसंत का बदन हिल पड़ा. वो बोला, “ऐसे, ऐसे, मंगल, ऐसे ही चोदो मुझे. मारो मेरी गांड को और फाड़ दो मेरी गांड को.”

भगवान ने लंड क्या बनाया है गांड मारने के लिए- कठोर और चिकना ! गांड क्या बनाई है मार खाने के लिए – टाइट और नर्म नर्म. जवाब नहीं उनका. मैने बसंत का कहा माना. फ़्री स्टाइल से टपा ठप्प मैं उसको चोदने लगा. दस पंद्रह धक्के में वो झड पड़ा . मैंने पिस्तनिंग चालू राखी.उसने अपनी उंगली से लंड को मसला और दूसरी बार झड़ा.गांड में इतने ज़ोर से संकोचन हुए कि मेरा लंड दब गया, आते जाते लंड की टोपी उपर नीचे होती गयी और मत्था और तन कर फूल गया. मेरे से अब ज़्यादा बर्दाश्त नहीं हो सका. गांड की गहराई में लंड दबाए हुए मैं ज़ोर से झाड़ा.वीर्य की चार पाँच पिचकारियाँ छूती और मेरे सारे बदन में झरझरी फैल गयी.मैं ढल पड़ा.

आगे क्या बताऊँ ? उस रात के बाद रोज़ बसंत चला आता था. हमें आधा एक घंटा समय मिलता था जब हम जम कर चुदाई करते थे. उसने मुझे कई टेक्नीक सिखाई और पोजीशन दिखाई. मैंने सोचा था कि कम से कम एक महीना तक बसंत को चोदने का लुत्फ़ मिलेगा, लेकिन ऐसा नहीं हुआ. एक हपते में ही वो वापस चला गया.

असली खेल अब शुरू हुआ.
बसंत के जाने के बाद तीन दिन तक कुछ नहीं हुआ. मैं हर रोज़ उसकी गांड याद करके मुठ मारता रहा. चौथे दिन मैं मेरे कमरे मैं पढ़ने का प्रयत्न कर रहा था, एक हाथ में टाइट लंड पकड़े हुए, और सुरेश आ पहुंचा.झटपट मैंने लंड छोड़ कपड़े सही किये और सीधा बैठ गया. वो सब कुछ समझता था इस लिए मुस्कुराता हुआ बोला, “कैसी चल रही है पढ़ाई? मैं कुछ मदद कर सकता हूँ ?”
“सुरेश, सब ठीक है” मैंने कहा.
आँखों में शरारत भर के सुरेश बोला, “पढ़ते समय हाथ में क्या पकड़ रक्खा था जो मेरे आते ही तुमने छोड़ दिया ?”
“नहीं, कुछ नहीं, ये तो..ये” मैं आगे बोल ना सका.
“तो मेरा लंड था, यही ना ?” उसने पूछा.
वैसे भी सुरेश मुझे अच्छा लगता था और अब उसके मुँह से “लंड” सुन कर मैं एक्साइटेड होने लगा. शर्म से उससे नज़र नहीं मिला सका. कुछ बोला नहीं.
उसने धीरे से कहा, “कोई बात नहीं. मैं समझता हूँ लेकिन ये बता, बसंत को चोदना कैसा रहा ? पसंद आई उसकी काली गांड ? याद आता होगी ना ?”
सुन के मेरे होश उड़ गये. सुरेश को कैसे पता चला होगा ? बसंत ने बता दिया होगा ? मैंने इनकार करते हुए कहा, “क्या बात करते हो ? मैंने ऐसा वैसा कुछ नहीं किया है”
“अच्छा  ?” वो मुस्कराता हुआ बोला, “क्या वो यहाँ भजन करने आता था ?”
“वो यहाँ आया ही नहीं,” मैंने डरते डरते कहा. सुरेश मुस्कुराता रहा.
“तो ये बताओ कि..”उसने सूखे वीर्य से अकड़ी हुई निक्कर दिखा के पूछा, “निक्कर किसकी है तेरे पलंग से जो मिली है ?”
मैं ज़रा जोश में आ गया और बोला, “ऐसा हो ही नहीं सकता, उसने कभी निक्कर पहनी ही…” मैं रंगे हाथ पकड़ा गया.
मैंने कहा, “सुरेश, क्या बात है ? मैंने कुछ ग़लत किया है ?”
उसने कहा,”वो तो तेरे भैया नक्की करेंगे.”

भैया का नाम आते ही मैं डर गया. मैंने सुरेश को गिड़गिड़ा के विनती की ताकि वो भैया को ये बात ना बताएँ. तब उसने शर्त रक्खी और सारा भेद खोल दिया.
सुरेश ने बताया कि वो मुझपे मरता है लेकिन कहीं मैं इनकार ना कर दूं, इसलिए बसंत के जाल में फंसाया गया था.

सच्छी ये थी कि मैं भी सुरेश पर मन ही मन मरता था.ये बातें सुन कर मैंने हंस के कहा “सुरेश, तुझे इतना कष्ट लेने की क्या ज़रूरत था ? तूने कहीं भी, कभी भी कहा होता तो मैं तुझे चोदने का इनकार ना करता, तुम चीज़ ही ऐसी मस्त हो.”
उसका चहेरा लाल हो गया. वो बोला, “रहने भी दो, आए बड़े चोदने वाले. चोदने के वास्ते लंड चाहिए और बसंत तो कहता था कि अभी तो तुमारी नुन्नी है. उसको गांड का रास्ता मालूम नहीं था. सच्ची बात ना ?”
मैंने कहा, “दिखा दूं अभी नुन्नी है या लंड ?”
“ना ना. अभी नहीं. मुझे सब सावधानी से करना होगा. अब तू चुप रहना, मैं ही मौक़ा मिलने पर आ जाउंगा और हम देखेंगे की तेरी नुन्नी है या लंड.”

दोस्तो, दो दिन बाद भैया भाभी दूसरे गाँव गये तीन दिन के लिए. उनके जाने के बाद दोपहर को वो मेरे कमरे में चला आया. मैं कुछ पूछूं इससे पहले वो मुझसे छिपक गया और मुँह से मुँह लगा कर फ़्रेंच क़िस करने लगा. मैंने उसकी  पतली कमर पर हाथ रख दिए. मुँह खोल कर हमने जीभ लड़ाई. मेरी जीभ होठों बीच लेकर वो चुसने लगा. मेरे हाथ सरकते हुए उसके चूतड़ पर पहुँचे. भारी चूतड़ को सहलाते सहलाते मैं उसकी लुंगी उपर तरफ़ उठाने लगा. एक हाथ से वो मेरा लंड सहलाता रहा. कुछ देर में मेरे हाथ उसके नंगे चूतड़ पर फिसलने लगे तो मेरा पाजामा खोल उसने नंगा लंड अपनी मुट्ठी में ले लिया.

मैं उसको पलंग पर ले गया और मेरी गोद में बिठाया .लंड मुट्ठी में पकड़े हुए उसने फ़्रेंच क़िस चालू रक्खी. मैंने अंडर वियर के उपर से उसका लंड दबाया.मेरा लंड छोड़ उसने अपने आप बनियान उतार फेंकी.सुरेश के निप्पल छोटे और कड़े थे.
. मैंने निपपल को चुटकी में लिया तो सुरेश बोल उठा “ज़रा होले से. मेरे निप्पल बहुत सेंसीटिव है .उंगली का स्पर्श सहन नहीं कर सकते..” उसके बाद मैंने निपपल मुँह में लिया और चूसने लगा.

मैं आप को बता दूं कि सुरेश कैसा था. पाँच फ़ीट पाँच इंच की लंबाई के साथ वज़न था साठ किलो. बदन पतला और गोरा था. चहेरा लम्बा, गोल तोड़ा सा जॉन अब्राहम जैसा. आँखें बड़ी बड़ी और काली. बाल काले, रेशमी और लम्बे.छाती चौड़ी और वी शेप में थी. बिल्कुल सपाट था. हाथ पाँव सुडौल थे. चूतड़ गोल और भारी थे. कमर पतली था. वो जब हँसता था तब गालों में खड्ढे पड़ते थे.
मैंने घुन्डियाँ पकड़ी तो उसने मेरा लंड थाम लिया और बोला, “मंगल, तुम तो बड़े हो गये हो. वाकई ये तेरी नुन्नी नहीं बल्कि लंड है और वो भी कितना तगड़ा ? अब ना तड़पाओ, जलदी करो.”

मैंने उसे लिटा दिया. ख़ुद उसने लुंगी उपर उठाई..जांघें चौड़ी की और पाँव फैला लिए .मैं उसकी गांड देख के दंग रह गया. घुन्डियाँ के माफ़िक सुरेश की गांड भी चौदह साल के लड़के की गांड जितनी छोटी थी. मैं उसकी जांघों के बीच आ गया. उसने अपने हाथों से गांड के होंट चौड़े पकड़ रक्खे तो मैंने लंड पकड़ कर सारी गांड पर रगडा.उसके चूतड़ हिलने लगे. अबकी बार मुझे पता था कि क्या करना है. मैंने लंड का माथा गांड के मुँह में घुसाया और लंड हाथ से छोड़ दिया. गांड ने लंड पकड़े रक्खा. हाथों के बल आगे झुककर मैंने मेरे हिप्स से ऐसा धक्का लगाया कि सारा लंड गांड में उतर गया.  लंड तमाक तुमक करने लगा और गांड में फटक फटक होने लगी.

मैं काफ़ी उत्तेजित हुआ था इसीलिए रुक सका नहीं. पूरा लंड खींच कर ज़ोरदार धक्के से मैंने सुरेश को चोदना शुरू किया. अपने चूतड़ उठा उठा के वो सहयोग देने लगा. लंड में से चिकना पानी बहने लगा. उसके मुँह से निकलता आााह जैसी आवाज़ और गांड की पूच्च पूच्च सी आवाज़ से कमरा भर गया.

पूरी बीस मिनिट तक मैंने सुरेश की गांड मारी. इस दौरान वो दो बार झडा.आख़िर उसने गांड ऐसी सिकोड़ी कि अन्दर बाहर आते जाते लंड की टोपी ऊपर नीचे करने लगा मानो कि गांड मुठ मार रहा हो. ये हरकट मैं बर्दाश्त नहीं कर सका, मैं ज़ोर से झड़ा. झड़ते वक़्त मैंने लंड को गांड की गहराई मर ज़ोर से दबा रखा था और टोपी इतना ज़ोर से खिंच गया था कि दो दिन तक लोडे मैं दर्द रहा. वीर्य छोड़ के मैंने लंड निकाला, हालांकि वो अभी भी तना हुआ था. सुरेश टाँगें उठाए लेता रहा कोई दस मिनिट तक उसने गांड से वीर्य निकलने ना दिया.

दोस्तो, क्या बताऊँ ? उस दिन के बाद भैया आने तक हर रोज़ सुरेश मेरे से चुदवाता रहा.

जिस दिन शाम वो मेरे पास आया. घबराता हुआ वो बोला, “मंगल, मुझे डर है की शशि और पंकज को शक हो गया है हमारे बारे में.”
सुन कर मुझे पसीना आ गया. भैया जान गए तो वश्य हम दोनो को जान से मार देंगे.मैंने पूछा, “क्या करेंगे अब ?”
“एक ही रास्ता है “वो सोच के बोला.
“क्या रास्ता है ?”
“तुझे उन दोनो को भी चोदना पड़ेगा. चोदेगा ?”
“सुरेश, तुझे चोदने बाद किसी दुसरे को चोदने का दिल नहीं होता. लेकिन क्या करें ? तू जो कहे वैसा मैं करूँगा.” मैंने बाज़ी सुरेश के हाथों छोड़ दी.

सुरेश ने प्लान बनाया. उसने सबसे पहले पंकज को पटाया.
थोड़े दिन बाद पंकज मेरे कमरे में चला आया.

आते ही उसने कपड़े निकालना शुरू किया. मैंने कहा, “पंकज, ये मुझे करने दे.” आलिंगन में ले कर मैंने फ़्रेंच किस किया तो वो तड़प उठा.समय की परवाह किए बिना मैंने उसे ख़ूब चूमा. उसका बदन ढीला पड़ गया. मैंने उसे पलंग पर लिटा दिया और होले होले सब कपड़े उतर दिए .मेरा मुँह एक निपपल पर चला गया, एक हाथ घुन्डियाँ दबाने लगा, दूसरा लंड के साथ खेलने लगा. थोड़ी ही देर में वो गरम हो गया.

उसने ख़ुद टांगे उठाई और चौड़ी पकड़ रक्खी. मैं बीच में आ गया. एक दो बार गांड की दरार में लंड का मत्था रगड़ा तो पंकज के चूतड़ डोलने लगे. इतना होने पर भी उसने शर्म से अपनी आँखें पर हाथ रक्खे हुए थे. ज़्यादा देर किए बिना मैंने लंड पकड़ कर गांड पर टिकाया और होले से अन्दर डाला. पंकज की गांड सुरेश की गांड जितनी सिकुड़ी हुई नहीं थी  लेकिन काफ़ी चिकनी थी और लंड पर उसकी अच्छा पकड़ था. मैंने धीरे धक्के से पंकज को आधे घंटे तक चोदा. इसके दौरान वो दो बार झड़ा .मैंने धक्के कि रफ़्तार बढ़ाई तो पंकज मुझसे लिपट गया और मेरे साथ साथ ज़ोर से झड़ा. वो पलंग पर लेटा रहा,मैं कपड़े पहन कर खेतों मे चला गया.

दूसरे दिन सुरेश अकेला आया .कहने लगा “कल की तेरी चुदाई से पंकज बहुत ख़ुश है. उसने कहा है कि जब चाहे मैं चोद सकता हूँ.”
मैं समझ गया.

अपनी बारी के लिए शशि को पंद्रह दिन राह देखनी पड़ी. आख़िर वो दिन आ भी गया. उसकी चुदाई का ख़याल मुझे अच्छा नहीं लगता था. लेकिन दूसरा चारा कहाँ था ?

हमारे अकेले होते ही शशि ने आँखें मूँद ली. मेरा मुँह घुन्डियाँ पर चिपक गया. मुझे बाद में पता चला कि शशि की चाबी उसकी घुन्डियाँ थे. इस तरफ़ मैंने घुन्डियाँ चूसाना शुरू किया तो उस तरफ़ उसके लंड ने काम रस का फव्वारा छोड़ दिया. मेरा लंड कुछ आधा ताना था.और ज़्यादा अकड़ने की गुंजाइश ना थी.लंड गांड में आसानी से घुस ना सका. हाथ से पकड़ कर धकेल कर मत्था गांड में पैठा कि शशि ने गांड सिकोडी. ठुमका लगा कर लंड ने जवाब दिया. इस तरह का प्रेमालाप लंड गांड के बीच होता रहा और लंड ज़्यादा से ज़्यादा अकड़ता रहा. आख़िर जब वो पूरा तन गया तब मैंने शशि के पाँव मेरे कंधे पर लिए और लंबे तल्ले से उसे चोदने लगा. शशि की गांड इतना टाइट नहीं थी लेकिन संकोचन करके लंड को दबाने की ट्रिक शशि अच्छा तरह जानता था. बीस मिनट की चुदाई में वो दो बार ज़ड़ी. मैंने भी पिचकारी छोड़ दी और उतरा.

दूसरे दिन सुरेश वही संदेशा लाया जो कि पंकज ने भेजा था. तीनो भाइयों ने मुझे चोदने का इशारा दे दिया था.

अब तीन भाई और चौथा मैं,हममें एक समझौता हुआ कि कोई ये राज़ खोलेगा नहीं. एक के बाद एक ऐसे मैं तीनो को चोदता रहा.हमारी सेवा में बसंत भी आ गया था और हमारी रेगूलर चुदाई चल रही थी.मैंने शादी ना करने का निश्चय कर लिया.

Comments


Online porn video at mobile phone


nude gay desi picsri+lanka+xxx+boy+xxxoriginal indian hunk cockkarachi pathan fuckedsex+man+tamil+xnxnxx+gays+onelyIndian desi boys sex.commajdoor wife force fucked big man indian vedioindian boy penis picindian tamil desi gaysex friendsnude hairy indian manpahalwan gay porndesi gay sex HD latest newsIndian pahlwan sexs gay man. comdesi gay sexxx in hindiIndian big cockxxxboyscocksex penis indiahot indian boy sexChacha ne gaand Madi real gay story in hindiindian Coimbatore boys gaysexhot desi indian nude malesdesi penis picsnude handsome desi gay pictureGAY Indian BOYindian gay pornindian desi gay uncle fuckingindian dick jhaant dick cockindian gay gay porn videoMan to man group sex videogay sex with uncle nudeTamil gaysex m2m cockindian dickfree gay porn stories in hindi baap ko gand marte dekhanude lungi boysindian handsome gay boy nudeजेल में चुदाईbollywood hero sex gaydesi hunksfarhad shahnawaz nakedxxxsexvideoahindidesigaymasturbatingindian gay pornuncle gays sex chennaidesi gay videosfamily sex confession kahaniindian boy penissuper models desi hunkindian gay sex porn imagedesi nude gaysdesi boy jerking offdesi+boys+nuditydesi indian boy and girl sex photonude desi dad picsindian gay hunktamil college boys sex photonaked indian gaydesi gay nude photoHot gay indin boy neked photodesi man big cockdesi gay nudetamil gay hot nude sexmere bade bhai ne mujhe choda gay sex videonaked Indian unclenude indian lund sexnude desi boysnew uploaded indian gay jerking videosnude sexy indian male teens gays showing their penisdeshi dick picdesi big cock imagesdesi movi gay xxxBigdesicocklivenew indian gay sex videoslatest gaysex videos mature neighboursdesi gay hunks nude picsbig indian cock photosdesi boy clean shave lund nudeuncut indian dickbig indian uncut dickoldmannakedindian gay sex picture penisedesi gay sperm sexdesi chaddi gand picswww.indianbigdickxvideo.comट्रेन में गांड मरवाई समलैंगिक सेक्स हिन्दी कहानीtamil gay sitemature gay porn picsmalayalam.gay pornNUDE INDIAN MANindian dick sex picsex indian man nudepunjabixxxfirangi fucks desi gay