Gay sex stories in Hindi – दोस्त के चाचा, भांजा और भाई की गांड मराई 1


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Gay sex stories in Hindi – दोस्त के चाचा, भांजा और भाई की गांड मराई 1

यह कहानी मेरे दोस्त के चाचा, भांजा और भाई को चोदने की है। ये बात आज से 9-10 वर्ष पहले की हैं जब मेरी उमर 20-21 साल की थी । उन दिनो मैं मुंबई में रहता था। मेरे मकान के बगल में एक नया किरायेदार सुखबिनेर रहने आया। वो किराये के मकान में अकेला रहता था। मेरी हम उमर का था इसलिये हम दोनो में गहरी दोस्ती हो गयी। वो मुझ पर अधिक विश्वास रखता था क्योंकि मैं सरकारी कर्मचारी था और उससे ज्यादा पढ़ा लिखा था। वो एक फेक्ट्री मे मशीन ओपरेटर था। उसके परिवार में केवल 4 सदस्य थे। उसका चाचा ३५ साल का,   भांजा २० साल का, भाई 18-19 साल का । वे सब उसके गावँ में रहकर अपनी खेती करते थे।
दिवाली में उसका चाचा और भाई मुंबई में 1 महीने के लिये आये हुये थे। दिसंबर में उसका चाचा और भाई वापस गाँव
जाने की जिद करने लगे। लेकिन काम ज्यादा होने के कारण सुखविंदर को 2 महीने तक कोई भी छुट्टी नहीं मिल सकती
थी। इसलिये वो टेंशन मे रहने लगा। वो चाहता था कि किसी का गाँव तक साथ हो तो वो चाचा और भाई को उसके साथ
भेज सकता है। लेकिन किसी का भी साथ नहीं मिला।
सुखविंदर को टेंशन में देख कर मैने पूछा, क्या बात है सुखविंदर, आज कल तुम ज्यादा टेंशन में रहते हो “

सुखविंदर: क्या करूँ यार, काम ज्यादा होने के कारण मेरा ऑफिस मुझे अगले 2 महीने तक छुट्टी नहीं दे रहा है और
इधर चाचा  गाँव जाने की जिद कर रहा है। मैं चाहता हूँ कि अगर गाँव तक किसी का साथ रहे तो चाचा और भाई अच्छी
तरह से गाँव पहुँच जायेंगे और मुझे भी चिंता नहीं रहेगी लेकिन गाँव तक का कोई भी साथ नहीं मिल रहा हैं ना ही
मुझे छुट्टी मिल रहा हैं इसलिये मैं काफी टेंशन में हूँ।

दीनू : यार अगर तुझे ऐतराज़ ना हो तो मैं तेरी प्रोब्लम हल कर सकता हूँ और मेरा भी फायदा हो जाएगा।

सुखविंदर : यार मैं तेरा यह एहसान ज़िन्दगी भर नहीं भूलूंगा अगर तुम मेरी प्रोब्लम हल कर दो तो। लेकिन यार तुम मेरी प्रोब्लम कैसे हल करोगे और कैसे तुम्हारा फायदा होगा  ”
दीनू : यार सरकारी दफ़तर के अनुसर, मुझे साल में 1 महीने की छुट्टी मिलती है। अगर मैं छुट्टी लेता हूँ तो मुझे गाँव या कहीं भी जाने का आने जाने का किराया भी मिलता है और एक महीने की पगार भी मिलती। अगर मैं छुट्टी ना लू तो 1 महीने की छुट्टी लेप्स हो जाती है और कुछ नहीं मिलता है।

सुखविंदर: यार तुम छुट्टी लेकर चाचा और भाई को गाँव पहुंचा  दो इस बहाने तुम मेरा गाँव भी घूम आना।अगले दिन ही मैने छुट्टी के लिये आवेदन पत्र दे दिया और मेरी छुट्टी मंज़ूर हो गयी।

सुखाविंदर लेकर हम दोनो को रेलवे स्टेशन पहुंचाने आया।  गाडी करीब रात 8:40 पर रवाना हुई । रात करीब 10 बजे हमने खाना खाया और गपशप करने लगे।
उसके भाई ने कहा “भैया मुझे नींद आ रहा है” और वो उपर के बर्थ पर सो गया। कुछ देर बाद चाचा भी नीचे के बर्थ पर चद्दर ओढ़ कर सो गया और कहा कि तुम अगर सोना चाहते हो तो मेरे पैर के पास सिर रख कर सो जाना। मुझे भी थोड़ी देर बाद नीद आने लगी और मैं उनके पैर के पास सिर रखा कर सो गया। सोने से पहले मैंने पेंट खोल कर शोर्ट पहन लिया। चाचा  अपने बायीं तरफ़ करवत कर के सो गया । कुछ देर बाद मुझे भी नींद आने लगी और मैं भी उनका चद्दर ओढ़ कर सो गया।
अचानक रात करीब 1:30 मेरी नींद खुली मैने देखा कि चाचा की लुंगी कमर के ऊपर थी .उसने अंडरवियर नहीं पहना था और उसकी गांड और लंड नज़र आ रहा था। उनका हाथ मेरे शोर्ट पर लंड के करीब था। यह सब देखकर मेरा लंड शोर्ट के अंदर फदफदने लगा। मैं कुछ भी समझ नहीं पा रहा था कि क्या करूँ। मैं उठकर पेशाब करने चला गया। जब वापस आया मैंने चद्दर उठा कर देखा तो अभी तक चाचा उसी अवस्था में सोया था । मैं भी उनकी  तरफ़ करवट कर के सो गया लेकिन मुझे नींद नहीं आ रही थी।मेरे भाग्य ने साथ दिया और हमारे डिब्बे की लाइट चली गयी. मैने सोचा कि भगवान् भी मेरा साथ दे रहा है। मैने अपना लंड शोर्ट से निकाल कर लंड के सुपडे की टोपी नीचे सरका कर सुपडे पर ढेर सरा थूक लगा कर सुपडे को गांड के मुख के पास रखा कर सोने का नाटक करने लगा। गाडी के धक्के के कारण थोडा सुपढ़ा उनका गांड में चला गया लेकिन चाचा की तरफ़ से कोई भी हरकत ना हुई । मुझे चाचा की तरफ से इशारे तो मिल रहे थे पर संकोच था.अब वो संकोच गायब हो गया था.
बार बार मेरी आँखों के समने उनका लंड घूम रहा था । थोड़ी देर बाद एक स्टेशन आया .वहां 5 मिनट तक ट्रेन रुकी था और मैं विचार कर रहा था कि क्या करूँ। जैसे ही गाडी चली या तो वो गहरी नींद में था या वो जानबूझ कर कोई हरकत नहीं कर रहा था मैं समझ नहीं पाया। गाडी के धक्के से केवल सुपडे का थोड़ा सा हिस्सा गांड में अंदर बाहर हो रहा था। एक बार तो मेरा दिल हुआ कि एक धक्का लगा कर पूरा का पूरा लंड गांड में डाल दूँ लेकिन संकोच और डर के कारण मेरी हिम्मत नहीं हुई। गाडी के धक्के से केवल सुपडे का थोड़ा सा हिस्सा गांड में टच  हो रहा था। इस तरह टच करते करते मेरे लंड ने ढेर सारा फ़ुवरा उनका गांड के ऊपर फ़ेक दिया। अब मैं अपना लंड शोर्ट में डाल कर सो गया।
करीब सवेरे 7 बजे चाचा ने उठाया और कहा कि चाय पी लो और तैयार हो जाओ क्योंकि 1 घंटे में हमारा स्टेशन आने वाला है। मैं फ्रेश हो कर तैयार हो गया। स्टेशन आने तक चाचा,भाई और मैं इधर उधर की बातें करने लगे। करीब 09:30 बजे हम सुखविंदर के घर पहूँचे। वहां पर सुखविंदर के भांजे ने हमारा स्वागत किया और कहा नो धो कर नाश्ता कर लो। हम नहा धो कर आँगन में बैठ कर नाश्ता करने लगे। करीब 11:00 बजे भांजे गोपाल ने चाचा से कहा ”
आप लोग थक गये होंगे, आप आराम कीजिये. मैं खेत में जा रहा हूँ और मैं शाम को लौटूंगा।”
चाचा ने कहा “ठीक है” और मुझसे बोला “अगर तुम आराम करना चाहो तो आराम कर लो नहीं तो गोपाल के साथ जाकर खेत देख लेना।”
मैने कहा “मैं आराम नहीं करूंगा क्योंकि मेरी नीद पूरी हो गया है, मैं खेत पर चला जाता हूँ .वहां पर मेरा टाइम पास भी हो जाएगा।”
मैं और गोपाल खेत की ओर निकाल पड़े । रास्ते में हम लोगो ने इधर उधर की काफी बातें की । उनका खेत बहुत बड़ा था खेत के एक कोने मे एक छोटा सा मकान भी था। दोपहर होने के कारण आजु बाजू के खेत में कोई भी न था। खेत पहुँच कर गोपाल काम में लग गया और कहा “तुझे अगर गर्मी लग रही हो तो शर्ट निकाल लो उस मकान में लुंगी भी हैं चाहे तो लुंगी पहन लो और यहाँ आकर मेरी थोड़ी मदद कर दो।”

मैंने मकान में जाकर शर्ट उतर दिया और लुंगी बनियान पहनकर गोपाल के काम में मदद करने लगा। काम करते करते कभी कभी मेरा हाथ गोपाल के चूतड़ पर टच होता था। कुछ देर बाद गोपाल से मैने पूछा, “गोपाल यहाँ कहीं पेसब करने की जगह है?”
गोपाल बोला ” मकान के पीछे जाकर कर लो।”
मैं जब पेशाब कर के वापस आया तो देखा गोपाल अब भी काम कर रहा था। थोड़ी देर बाद गोपाल बोला “आओ अब खाना खाते हैं और थोड़ी देर आराम करके फ़िर काम में लग जाते है” अब हम खेत के कोने वाले मकान में आकर खाना खाने की तैयारी करने लगे। मैं और गोपाल दोनो ने पहले हाथ पैर धोये फिर खाना खाने बैठ गये।
गोपाल मेरे सामने ही बैठ कर खाना खा रहा था। खाना खाते समय मैने देखा कि मेरी लुंगी जरा साइड में हट गई थी जिस
कारण मेरे अंडरवियर से आधा निकला हुआ लंड दिखायी दे रहा था। और गोपाल की नज़र बार बार मेरे लंड पर जा रही थी .

लेकिन उसने कुछ नहीं कहा । खाना खाने के बाद गोपाल बरतन धोने लगा. जब वो झुककर बरतन धो रहा था तो मुझे
उनके बड़े बड़े चूतड़ साफ़ नज़र आ रहे थे। बरतन धोने के बाद उसने कमरे में आकर चटाई बिछा दी और बोला “चलो थोड़ी देर आराम करते है”
मैं चटाई पर आकर लेट गया। गोपाल बोला ” आज तो बड़ी गर्मी है” कह कर उसने अपनी लुंगी खोल दी और केवल कच्छा और बनियान पहन कर मेरे बगल में आकर उस तरफ़ करवट कर के लेट गया।
अचानक मेरी नज़र उनके कच्छे पर गई । वहां पर से उसके कुछ कुछ झांटें दिखायी दे रहा था। अब मेरा लंड लुंगी के अंदर हरकत करने लगा। थोड़ी देर बाद गोपाल ने करवट बदली तो मैने तुरंत आँखें बंद करके सोने का नाटक करने लगा।
थोड़ी देर बाद गोपाल उठा और मकान के पीछे चल पड़ा। मैं उत्साह के कारण मकान की खिड़की पर गया। खिड़की बंद थी लेकिन उसमे एक सुराख था. मैंने सुराख पर आँख लगाकर देखा तो मकान का पिछला भाग साफ़ दिखायी दे रहा था। गोपाल वहां पेशाब करने लगा .पेशाब करने के बाद गोपाल थोड़ी देर अपनी गांड सहलाता रहा फिर उठकर मकान के अंदर आने लगा। फ़िर मैं तुरंत ही अपनी जगह पर आकर लेट गया। गोपाल जब मकान में आया तो मैं भी उठकर पिछली तरफ़ पेशाब करने चला गया।
मैं जानबूझ कर खिड़की की तरफ़ लंड पकड़ कर पेशाब करने लगा. मैने महसूस किया कि खिड़की थोड़ी खुली हुई थी और
गोपाल की नज़र मेरे लंड पर थी । पेशाब करके जब आया तो देखा गोपाल चित लेटा हुआ था। मेरे आने के बाद गोपाल
बोला “भैया आज मेरी कमर बहुत दुख रही है। क्या तुम मेरी कमर की मलिश कर सकते हो ”
मैने कहा “क्यों नहीं।”

उसने कहा “ठीक है. सामने तेल का शीशी पड़ी हैं उसे लेकर मेरी कमर की मालिश कर देना। और फिर वो पेट के बल लेट गया। मैं तेल लगा कर उसके कमर की मालिश करने लगा। वो बोला “भैया थोड़ा नीचे मालिश करो।”
मैने कहा “गोपाल थोड़ा कच्छे का नाड़ा ढीला करेगा तो मालिश करने में आसानी होगी और कच्छे पर तेल भी नहीं लगेगा।”
गोपाल ने कच्छे का नाड़ा ढीला कर दिया. अब मैं उसकी कमर पर मालिश करने लगा। उसने और थोड़ा नीचे मालिश करने को कहा। मैं थोड़ा नीचे की तरफ़ मालिश करने लगा। थोड़ी देर मालिश करने के बाद वो बोला “बस भैया” और नाड़ा बंद कर लेट गया। मैं भी बगल में आकर लेट गया।
अब मेरे दिल और दिमाग ने कैसे चोदा जाए यह विचार करने लगा। आधे घंटे के बाद गोपाल उठा और लुंगी पहन कर अपने काम में लग गया।

शाम को करीब 6 बजे हम घर पहुँचे। घर पहुँचकर मैने कहा “चाचा में बाज़ार जा रहा हूँ। 1 घंटे बाद आ जाऊँगा ”
यह कहकर मैं बाज़ार की और निकल पड़ा .रास्ते में मैं शराब की दुकान से बीयर की बोतलें ले आया। घर आकर हाथ पैर धो कर केवल लुंगी पहन कर दूसरे कमरे में जाकर बीयर पीने लगा।
एक घंटे में मैने 4 बोतल बीयर पी ली और बीयर का नशा हावी होने लगा। इतने मे गोपाल ने खाने के लिये आवाज़ लगई । हम सब साथ बैठ कर खाना खाने लगे। खाना खाने के बाद मैं सिगरेट की दुकान पर जाकर सिगरेट पीने लगा.

जब वापस आया तो आँगन मे सब बैठ कर बातें कर रहे थे। मैं भी उसके बातों मे शामिल हो गया और हंसी मजाक करने
लगा। बातों बातों में गोपाल चाचा से बोला “चाचा, दीनू भैया अच्छी मालिश करता है. आज खेत में काम करते करते अचानक मेरी कमर मे दर्द उठा तो इसने अच्छी मालिश की और कुछ ही देर में मुझे आराम आ गया”
चाचा हँस पड़ा और मेरी तरफ़ अजीब नज़रों से देखने लगा। मैंने कुछ नहीं कहा और सिर झुका लिया। करीब आधे घंटे के बाद भाई और गोपाल सोने चले गए। मैं और चाचा इधर उधर की बातें करते रहे।

करीब रात 11 बजे चाचा बोला “आज तो मेरे पैर दुख रहे

है। क्या तुम मालिश कर दोगे।”

दीनू  : हाँ क्यों नहीं। लेकिन आप केवल सूखी मालिश

करवाओगे या तेल लगाकर ?

चाचा : अगर तेल लगा कर करोगे तो आसानी होगी और

आराम भी मिलेगा.
: ठीक है, लेकिन सरसों हो तो और भी अच्छा रहेगा और

जल्दी आराम मिलेगा।

फिर चाचा उठ कर अपने कमरे में गया और मुझे भी अपने

कमरे में बुला लिया। मैने कहा “आप चलिये मैं पेशाब करके

आता हूँ।”
मैं जब पेशाब करके उनके कमरे में गया तो देखा चाचा अपनी लुंगी खोल रहा था। मुझे देख कर बोला “तेल के दाग लुंगी पर ना लगे इसलिये लुंगी उतार रहा हूँ।”
हम अब केवल बनियान और लुंगी में थे। वह तेल की डिब्बी मुझे देकर बिस्तर पर लेट गया। मैंने भी उनके पैर के पास बैठ कर उनके पैर से लुंगी थोडा ऊपर किया और तेल लगा कर मालिश करने लगा। चाचा बोला “बड़ा आराम आ रहा है। जरा पिंडली में जोर लगा कर मालिश करो। मैने फिर उसके दायाँ पैर अपने कंधे में रखा कर पिंडली में मालिश करने लगा। उसका  एक पैर मेरे कंधे पर था और दूसरा नीचे था जिस कारण मुझे उसके झांटें, लंड और गांड के दर्शन हो रहे थे
क्योंकि चाचा ने अंदर अंडरवियर नहीं पहना था। उसके गांड के दर्शन पाते ही मेरा लंड हरकत करने लगा। चाचा ने अपनी  लुंगी घुटनों के थोड़ा ऊपर करके कहा “जरा और ऊपर मालिश करो।” मैं अब पिंडली के ऊपर मालिश करने लगा और उसकी  लुंगी घुटनों के ऊपर होने के कारण अब मुझे उसकी गांड साफ़ दिखाई दे रही थी इस कारण मेरा लंड फूल कर लोहे की तरह कड़ा और सख्त हो गया। और अंडरवियर फाड़कर बाहर निकलने को बेताब हो रहा था। मैं थोड़ा थोड़ा ऊपर मालिश करने लगा और मालिश करते करते मेरी उंगलियाँ कभी कभी उसके जाँघों के पास चली जाती थी । जब भी मेरी अंगुलियाँ उनके जाँघों को स्पर्श करती तो उनके मुँह से हाआ हाअ की आवाज़ निकलती । मैने उसकी ओर  देखा तो चाचा की आँखें बंद नहीं थी । और बार बार वो अपने होंटों पर अपनी जीभ फेर रहा था। मैंने सोचा की मेरी अँगुलियों के स्पर्श से चाचा को मजा आ रहा है क्यों ना इस सुनहरे मौके का फायदा उठाया जाए। मैने चाचा से कहा “चाचा मेरे हाथ तेल की चिकनाहट के कारण काफी फिसल रहे है। यदि आपको अच्छा नहीं लगता है तो मालिश बंद कर दूँ ”
चाचा ने कहा “कोई बात नहीं मुझे काफी आराम और सुख मिल रहा है।”
फिर मैं अपनी हथेली पर और तेल लगा कर उसके घुटनों के ऊपर मालिश करने लगा. मालिश करते करते मेरी उंगलियाँ उसके गांड के इलाके के पास टच होने लगी . वो आँखें न बंद करके केवल आहे भर रहा था. मेरी अंगुलियाँ उसके कच्छे के अंदर गांड तो छूने की कोशिश कर रही थी । अचानक मेरी अंगुली ने उसकी गांड तो टच किया. मैंने थोड़ा घबरा कर अपनी अंगुली उसकी गांड से हटा ली और उसके प्रतिक्रिया जानने के लिए उसके चेहरे की और देखा लेकिन चाचा की आँखें  बंद थीं.वो कुछ नहीं बोल रहा था। इधर मेरा लंड सख्त होकर अंडरवियर के बाहर निकलने को बेताब हो रहा था। मैने चाचा से कहा “चाचा मुझे पेशाब लगा है, मैं पेशाब करके आता हूँ फ़िर मालिश करूंगा।”
चाचा बोला “ठीक है, वाकई तू बहुत अच्छा मालिश करता है। मन करता है मैं रात भर तुझसे मालिश करवाऊं । ”
मैं बोला “कोई बात नहीं. आप जब तक कहोगे मैं मालिश करूंगा” यह कहा कर मैं पेशाब करने चला गया।

जब पेशाब करके वापस आ रहा था तो गोपाल के कमरे से मुझे कुछ कुछ आवाज़ सुनाई दी. उत्सुकता से मैने खिड़की की और देखा तो वह थोड़ी खुली थी .मैने खिड़की से देखा कि गोपाल एक दम नंगा लेटा था और अपने गांड में ककड़ी डाल कर ककड़ी को अंदर बाहर कर रहा था और मुँह से हा हाआ हाअ की आवाज़ निकाल रहा था। यह सीन देखकर मेरा लंड फिर खड़ा हो गया। मैने सोचा गोपाल की मालिश कल करूंगा. आज सुखविंदर के चाचा की मालिश करता हूँ क्योंकि तवा गरम है तो रोटी सेक लेनी चाहिये। मैं फिर चाचा के कमरे में चला गया।

मुझे आया देखकर चाचा ने कहा “भैया लाइट बुझा कर डिम लाइट चलो कर दो ताकि मालिश करवाते करवाते अगर मुझे नींद आ गयी तो तुम भी मेरे बगल में सो जाना। मैने ट्यूब लाइट बंद करके डिम लाइट चालू कर दी. जब वापस आया तो चाचा पेट के बल लेटा था और उसकी लुंगी केवल उसके भरी भरी चूतड़ों के ऊपर थी. बाकी पैरों का हिस्सा नंगा था बिलकुल नंगा था। अब मैं हथेली पर ढेर सारा तेल लगा कर उसके पैरों की मालिश करने लगा. पहले पिंडली पर मालिश करता रहा फिर मैं धीरे धीरे घुटनों के ऊपर जाँघों के पास चूतड के नीचे मालिश करता रहा। लुंगी चूतड़ पर होने से मुझे उसके झांटें और गांड का छेद नज़र आ रहा था। अब मैं हिम्मत कर के धीरे धीरे उसकी लुंगी कमर तक ऊपर कर दी.चाचा कुछ नहीं बोला और उसके आँखें बंद थीं।
मैने सोचा शायद उनको नींद आ गयी होगी। अब उसकी गांड और गांड के बाल मुझे साफ़ साफ़ नज़र आ रहे थे। मै हिम्मत करके तेल से भरी हुई अंगुली उसकी गांड के छेद के ऊपर रगड़ने लगा. वो कुछ नहीं बोला. मेरी हिम्मत और बढ़ गयी। मेरा अंगूठा उसके लंड को टच कर रहा था और अंगूठे की बगल की अंगुली उसकी गांड के छेद को सहला रही थी । यह सब हरकत करते करते मेरा लंड टाइट हो गया और गांड में घुसने के लिया बेताब हो गया। इतने में चाचा ने कहा “भैया मेरी कमर पर भी मालिश कर दो” तो मैं उठकर पहले चुपके से मेरा अंडरवियर निकाल कर उसके कमर पर मालिश करने लगा।
थोड़ी देर बाद मैंने चाचा से कहा “चाचा तेल से आप का बनियान खराब हो जाएगा। क्या आप अपने बनियान को थोड़ा ऊपर उठा सकते हो ” यह सुनकर चाचा ने अपने बनियान  बनियान को ऊपर उठा दिया। मैं फिर मालिश करने लगा. मालिश करते करते कभी कभी मेरी हथेली साइड से उसके अन्डुओं को छू जाती । उसकी कोई भी प्रतिक्रिया ना देखकर मैने उनसे कहा “चाचा अब आप सीधे लेटो. मैं अब आपकी स्पेशल तरीके से मालिश करना चाहता हूँ। चाचा करवट बदल कर सीधे हो गया. मैने देखा अब भी उसके आँखें बंद थी .चाचा ने धीमी आवाज़ मे कहा, ” अब तुम थक गये होंगे.  इनहा आओ और मेरे पास ही लेट जाओ । ”
पहले तो मैं हिचकिचाया क्योंकि मैंने केवल लुंगी पहना था और लुंगी के अंदर मेरा लंड गांड के लिये तड़प रहा था. वो मेरी परेशानी ताड़ गया और बोला, “कोई बात नही, तुम अपनी बनियान उतार दो और रोज जैसे सोते हो वैसे ही मेरे पास सो जाओ। शरमाओ मत। आओ ना।” मुझे अपने कानों पर यकीन नही हो रहा था। मैं बनियान उतार कर उसके पास लेट गया। जिस बदन को कभी से निहार रहा था आज मैं उसी के पास लेटा हुआ था। चाचा का अधनंगा शरीर मेरे बिलकुल पास था। मैं ऐसे लेटा था कि उसका लंड बिलकुल साफ़ दिखायी दे रहा था, क्या हसीन नज़ारा था। तब चाचा बोला, “इतने महीने बाद मालिश करवाई है इसलिए काफी आराम मिला है।” फिर उसने मेरा हाथ पकड़ कर धीरे से खींच कर अपने लंड पर रखा दिया और मैं कुछ नहीं बोल पाया लेकिन अपना हाथ उसके लंड पर रखा रहने दिया। “मुझे यहाँ कुछ खुजा रहा है, जरा सहलाओ ना।” मैंने उसके लंड को सहलाना शुरु किया। फिर कभी कभी जोर जोर से उसके लंड को रगरना शुरु कर दिया। मेरी हथेली की रगड़ पा कर चाचा का लंड कड़ा हो गया ।अचानक वो अपनी पीठ मेरी तरफ़ घुमाकर कर बोला, “थोड़ा कस कर दबाओ ना।” मैं भी काफी उत्तेजित हो गया और जोश मे आकर उसके लंड से जम कर खेलने लगा।  कड़ा कड़ा लंड और बड़े बड़े अन्डुए। चाचा को भी मुझसे अपने लंड की मालिश करवाने मे मज़ा आ रहा था। मेरा लंड अब खड़ा होने लगा था और लुंगी से बाहर निकाल आया। मेरा 9″ का लंड पूरे जोश मे आ गया था। चाचा का लंड मसलते मसलते हुए मैं उसके बदन के बिलकुल पास आ गया था और मेरा लंड उसकी जाँघों मे रगड़ मरने लगा था। अब उसने कहा ” तुम्हारा तो लोहे समान हो गया है और इसका स्पर्श से लगता है कि काफी लंबा और मोटा होगा. क्या मैं हाथ लगा कर देखूं ” उसने पूछा और मेरे जवाब देने से पहले अपना हाथ मेरे लंड पर रखा कर उसको टटोलने लगा।

अपनी मुट्ठी मेरे लंड पर कस के बंद कर ली और बोला, “बाप रे, बहुत कड़क है।” वो मेरी तरफ़ घूमा और अपना हाथ मेरी लुंगी मे घुसा कर मेरे फर-फरते हुए लंड को पकड़ लिया। लंड को कस कर पकड़े हुए वो अपना हाथ लंड के जड़ तक ले गया जिससे सुपरा बाहर आ गया।

Gay sex stories in Hindiअगले भाग के लिए इंतेज़ार कीजिए

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