Gay sex story in Hindi font – ट्यूशन 2


Click to this video!

Gay sex story in Hindi font – ट्यूशन 2

मैं परेशान होकर बोला “सॉरी सर, माफ़ कर दीजिये, बहुत बड़ा है. एक बार और करने दीजिये प्लीज़, अब जरूर ले लूंगा सर”
सर नाराज हो जायें तो फ़िर आगे की मस्ती में ब्रेक लगना लाजमी था. और सरके लंड का अब तक मैं आशिक हो चुका था. सर ने देखा तो मुझे भींच कर चूम लिया. मुस्कराते हुए बोले “अरे मैं तो मजाक कर रहा था. सच में सर अच्छे लगते हैं? कसम से?”

मैं कसम खा कर बोला, उनके पैर भी पकड़ लिये. “हां सर, मैं आप को छोड़ कर नहीं जाना चाहता, जो भी लेसन आप सिखायेंगे, मैं सीखूंगा”

“तो आज मैं तुझे दो लेसन दूंगा. दो तीन घंटे लग जायेंगे. बाद में मुकरेगा तो नहीं? पीछे तो नहीं हटेगा? सोच ले” उनके हाथ अब प्यार से मेरे चूतड़ों को सहला रहे थे.

मैंने फ़िर से उनके पैर छू कर कसम खाई “नहीं सर, आप जो कहेंगे वो करूंगा सर. मुझे अपना लंड चूसने दीजिये सर एक बार फ़िर से” सर के पैर भी बड़े गोरे गोरे थे, वे रबड़ की नीली स्लीपर पहने थे, उन्हें छू कर अजीब सी गुदगुदी होती थी मन में.

“ठीक है, वैसे तेरे बस का भी नहीं है मेरा ये मूसल ऐसे ही लेना.  ऐसा करते हैं कि अपने इस मूसल को मैं बिठाता हूं. देख, तैयार रह, बस मिनिट भर को बैठेगा ये, तू फ़टाक से ले लेना मुंह में, ठीक है ना?”

मैंने मुंडी हिलाई, फ़िर बोला “पर सर … बिना झड़े ये कैसे बैठेगा?”

सर ने अपने तन कर खड़े लंड की जड में एक नस को चुटकी में पकड़ा और दबाया. उनका लंड बैठने लगा “दर्द होता है थोड़ा ऐसे करने में इसलिये मैं कभी नहीं करता, बस तेरे लिये कर रहा हूं. देखा तुझपर कितने मेहरबान हैं तेरे सर?”

सर का लंड एक मिनिट में सिकुड़ कर छोटे इलायची केले जैसे हो गया. “इसे क्या कहते हैं जब ये सिकुड़ा होता है?” सर ने पूछा.

“नुन्नी सर”

“नालायक, नुन्नी कहते हैं बच्चों के बैठे लंड को. बड़ों के बैठे लंड को लुल्ली कहते हैं. अब जल्दी दे मेरी लुल्ली मुंह में ले. इसे तो ले लेगा ना या ये भी तेरे बस की बात नहीं है?” सर ने ताना दिया.

मैंने लपककर उनकी लुल्ली मुंह में पूरी भर ली. उनकी बैठी लुल्ली भी करीब करीब मेरे खड़े लंड जितनी थी. मुंह में बड़ी अच्छी लग रही थी, नरम नरम लंबे रसगुल्ले जैसी.

सर ने कहा “शाबास, बस पड़ा रह. तेरा काम हो गया. अब अपने आप सीख जायेगा पूरा लंड लेना” और मेरे सिर को अपने पेट से सटा कर बिस्तर पर लेट गये और मेरे बदन को अपनी मजबूत टांगों के बीच दबा लिया.

मैं मन लगाकर सर का लंड चूसने लगा. उनका लंड अब फ़टाफ़ट खड़ा होने लगा. आधा खड़ा लंड मुंह में भर कर मुझे बहुत मजा आ रहा था. पर एक ही मिनिट में सर का सुपाड़ा मेरे गले तक पहुंच गया और फ़िर मेरे गले को चौड़ा करके हलक के नीचे उतरने लगा. मुझे थोड़े घबराहट हुई, जब मैंने लंड मुंह से निकालना चाहा तो सर ने मेरे चेहरे को कस के अपने पेट पर दबा लिया “घबरा मत बेटे, ऐसे ही तो जायेगा अंदर, गले को ढीला कर, फ़िर तकलीफ़ नहीं होगी”

मेरा दम सा घुटने लगा. मैंने कसमसा कर सिर अलग करने की कोशिश की तो सर मुझे नीचे पटककर मेरे ऊपर चढ़ गये और मेरे सिर को कस के अपने नीचे दबा कर मेरे ऊपर ओंधे सो गये. उनकी झांटों में मेरा चहरा पूरा दब गया. “मैंने कहा ना घबरा मत. वैसे भी मैं तुझे छोड़ने वाला नहीं हूं. ये लेसन अब तुझे मैं पास करवा कर रहूंगा”

सर का लंड अब पूरा तन कर मेरे गले के नीचे उतर गया था. सांस लेने में भी तकलीफ़ हो रही थी. सर ने अपने तलवों और चप्पल के बीच मेरे लंड को पकड़ा और रगड़ने लगे. दम घुटने के बावजूद सर का लंड मुंह में बहुत मस्त लग रहा था. सर की झांटों में से भीनी भीनी खुशबू आ रही थी.

अचानक अपने आप मेरा गला ढीला पड गया और सर का बाकी लंड अपने आप मेरे हलक के नीचे उतर गया. मैं चटखारे ले लेकर लंड चूसने लगा.

“हां … ऽ ऐसे ही मेरे बच्चे … हां …. अब आया तू रास्ते पर, बस ऐसा ही चूस. अब ये लेसन आ रहा है तेरी समझ में … बहुत अच्छे मेरे बेटे … बस ऐसे ही चूस …. अब घबराना मत, मैं तेरे गले को धीरे धीरे चोदूंगा. ठीक है ना?”

मैं बोल तो नहीं सकता था पर मुंडी हिलाई. सर ने मेरे हाथ पकड़कर अपने चूतड़ों के इर्द गिर्द कर दिये “मुझे पकड़ ना प्यार से अनिल. मेरे चूतड़ दबा. शरमा मत. अपने सर के चूतड भी देख, लंड का मजा तो ले ही रहा है, इसके साथ साथ अपने सर का पिछवाड़ा भी देख. मजा आया ना? ये हुई ना बात, हां ऐसे ही अनिल … और दबा जोर से”

मैं सर के चूतड़ों को बांहों में भरके उनको दबा रहा था. सर के चूतड़ अच्छे बड़े बड़े थे. सर अब हल्के हल्के मेरे मुंह को चोद रहे थे. मेरे गले में उनका लंड अंदर बाहर होता था तो अजीब सा लगता था, खांसी आती थी. मेरे मुंह में अब लार भर गयी थी इसलिये लंड आराम से मेरे गले में फ़िसल रहा था.

कुछ देर चोदने के बाद सर अपने बगल पर लेट गये और मेरा सिर छोड़कर बोले “अब तू खुद अपने मुंह से मेरे लंड को चोद, अंदर बाहर कर. ये होता है असली चूसना. बहुत अच्छा कर रहा है तू अनिल … ऐसे ही कर .. आह …. ओह … अनिल बेटे …. तू तो लगता है अव्वल मार्क लेगा इस लेसन में … कहां मुझे लगा था कि तू फ़ेल न हो जाये और यहां ऽ … ओह … ओह … तू एकदम एक्सपर्ट जैसा कर रहा है …. एकदम किसी रंडी जैसा …. हां ऐसे ही मेरे राजा … पूरा निकाल और अंदर ले … बार बार … ऐसे ही ….”

सर मस्ती से भाव विभोर होकर मुझे शाबासी दे रहे थे और मेरे बालों में प्यार से उंगलियां चला रहे थे. सर का लंड नाग जैसा फ़ुफ़कार रहा था. मुझे न जाने क्या हुआ कि मैंने अचानक उसे पूरा मुंह से निकाला और ऊपर करके उसका निचला हिसा जीभ रगड़ रगड़ कर चाटने लगा. सर मस्ती से झूम उठे ” आह … हां … हां मेरी जान … मेरे बच्चे … ऐसे ही कर …. ओह … ओह “एक मिनिट वे मुझसे ऐसे ही लंड चटवाते रहे और फ़िर बाल पकड़कर लंड को फ़िर से मेरे मुंह में घुसाने की कोशिश करने लगे.

मुझे बड़ा फ़क्र हुआ कि सर को मैं इतना सुख दे रहा हूं. मैंने फ़िर से उनका लंड मुंह में ले लिया और आराम से निगल लिया. अब लंड निगलने में मुझे कोई तकलीफ़ नहीं हो रही थी, ऐसा लगता था कि ये काम मैं सालों से कर रहा हूं. सर ने घुटने मोड़े तो मेरा हाथ उनके पैर में लगा. मैं अपना हाथ उनके पैरों के तलवे और चप्पल पर फ़िराने लगा. सर की चप्पल बड़ी मुलायम थी, उसे छूने में मजा आ रहा था.

अब मैं सर की मलाई के लिये भूखा था. लगता था कि चबा चबा कर उनका लंड खा जाऊं. मेरे हाथ उनके मजबूत मोटे चूतड़ों पर घूम रहे थे. मेरी उंगली उनकी गांड के बीच की लकीर पर गयी और बिना सोचे मैंने अपनी उंगली उनके छेद से भिड़ा दी. सर ऐसे बिचके जैसे बिच्छू काट खाया हो. अपने चूतड़ हिला हिला कर वे मेरे मुंह में लंड पेलने लगे. “अनिल, उंगली अंदर डाल दे, ये अगले लेसन में मैं करवाने वाला था पर तू … इतना मस्त सीख रहा है …. चल उंगली कर अंदर”

मैंने सर की गांड में उंगली डाली और चूतड़ पकड़कर सिर आगे पीछे करके अपने मुंह से लंड बार बार अंदर बाहर करते हुए चूसने लगा. बीच में सुपाड़े को जीभ और तालू के बीच लेकर दबा देता. मेरी उंगली उककी गांड बराबर खोद रही थी. सर ऐसे बिचके कि मेरा सिर पकड़ा और उसे ऐसे चोदने लगे जैसे किसी फ़ूटबाल को चोद रहे हों. उनका लंड उछला और मेरे मुंह में वीर्य उगलने लगा. एक दो पिचकारियां सीधे मेरे गले में उतर गयीं.

फ़िर सर ने ही अपना लंड बाहर खींचा और मेरी जीभ पर सुपाड़ा रखकर उसे प्यार से झड़ाने लगे. उनकी सांस तेज चल रही थी “बहुत अच्छे अनिल …. क्या बात है …. अरे तू छुपा रुस्तम निकला बेटे …. …. लगता है तुझे ये कला जनम से आती है …. ले बेटे …. मजे कर …. ले मेरी मलाई खा …ऐश कर … गाढ़ी है ना? …. जैसी तुझे अच्छी लगती है?”

मैं चटखारे ले लेकर सर का वीर्य पीता रहा. एकदम चिपचिपा लेई जैसा था पर स्वाद लाजवाब था. मैंने अब भी सर के चूतड़ पकड़ रखे थे और मेरी उंगली उनकी गांड में थी. मेरा ध्यान पीछे के आइने पर गया उसमें सर का पिछवाड़ा दिख रहा था. क्या चूतड थे सर के, पहली बार मैं ठीक से देख रहा था. गोरे गोरे और गठे हुए.

मुझे पूरा वीर्य पिलाकर सर ने मुझे आलिंगन में लिया और मेरे निपल मसलते हुए बोले “भई मान गये आज अनिल, चेला गुरू से आगे निकल गया, तुझमें तो कला है कला लंड चूसने की. अपने सर का प्रसाद अच्छा लगा?”

“हां सर, बहुत मस्त है, इतना सुंदर लंड है सर …… और स्वाद भी उतना ही अच्छा है सर सर ….. आपकी ….मेरा मतलब है कि आप के …. याने” और सकुचा कर चुप हो गया.

“बोलो बेटे … मेरे क्या” सर ने मुझे पुचकारा.

“सर आपके चूतड़ भी कितने अच्छे हैं” मैं बोला.

“ऐसी बात है? अरे तो शरमाते क्यों हो? ये तो मेरे लिये बड़े हौसले की बात है कि तेरे जैसे चिकने लड़के को मेरे चूतड़ …. या मेरी गांड कहो … ठीक है ना? …. गांड अच्छी लगी. ठीक से देखना चाहोगे?”

“हां सर” मैं धीरे से बोला.

“लो बेटे, कर लो मुराद पूरी. वैसे ये तेरा आज का दूसरा लेसन है. बड़ी जल्दी जल्दी लेसन ले रहा है आज तू अनिल, आज ही पढ़ाई खतम करनी है क्या?” कहते हुए सर ओंधे लेट गये. उनके चूतड़ दिख रहे थे. मैं उनके पास बैठा और उनको हाथ से सहलाने लगा. फ़िर एक उंगली सर की गांड में डालने की कोशिश करने लगा, कनखियों से देखा कि बुरा तो नहीं मान गये पर सर तो आंखें बंद करके मजा ले रहे थे. उंगली ठीक से गयी नहीं, सर ने छल्ला सिकोड़ कर छेद काफ़ी टाइट कर लिया था.

“गीली कर ले अनिल मुंह में ले के, फ़िर डाल” सर आंखें बंद किये ही बोले. मैंने अपनी उंगली मुंह में ले के चूसी और फ़िर सर की गांड में डाल दी. आराम से चली गयी. “अंदर बाहर कर अनिल. ऐसे ही … हां … अब इधर उधर घुमा…. जैसे टटोल रहा हो… हां ऐसे ही … बहुत अच्छे बेटे … कैसा लग रहा है अनिल …. मेरी गांड अंदर से कैसी है …. ?…”

मैंने कहा “बहुत मुलायम है सर … एकदम मखमली …..”

“तूने कभी खुद की गांड में उंगली नहीं की?” चौधरी सर ने पूछा.

“सर …. एक बार की थी पर दर्द होता है”

“मूरख…. सूखी की होगी …ये लेसन समझ ले … गांड भी चूत जैसी ही कोमल होती है और उससे भी चूत जैसा ही …. चूत से ज्यादा आनंद लिया जा सकता है … ये मैं तुझे अगले लेसन में और बताऊंगा.”

फ़िर वे उठ कर बैठ गये. उनका लंड आधा खड़ा हो गया था. “अब आ मेरे पास, तुझे जरा मजा दूं अलग किस्म का. देख तेरा कैसा खड़ा है मस्त”

मुझे गोद में लेकर सर बैठ गये और मेरे लंड को तरह तरह से रगड़ने लगे. कभी हथेलियों में लेकर बेलन सा रगड़ते, कभी एक हाथ से ऊपर से नीचे तक सहलाते तो कभी उसे मुठ्ठी में भरके दूसरे हाथ की हथेली मेरे सुपाड़े पर रगड़ते. मैं परेशान होकर मचलने लगा. बहुत मजा आ रहा था, रहा नहीं जा रहा था “सर … प्लीज़ … प्लीज़ सर …. रहा नहीं जाता सर”

चौधरी सर मेरा कान प्यार से पकड़कर बोले “ये मैं क्या सिखा रहा हूं मालूम है?”

“नहीं सर”

“मुठ्ठ मारने की याने हस्तमैथुन की अलग अलग तरह की तरकीब सिखा रहा हूं. समझा? और भी बहुत सी हैं, धीरे धीरे सब सिखा दूंगा. और एक बात …. ये सीख ले कि ऐसे मचलना नहीं चाहिये …. असली आनंद लेना हो तो खुद पर कंट्रोल रखकर मजा लेना चाहिये … जैसे मैंने तुझसे आधे घंटे तक लंड चुसवाया, झड़ने के लिये दो मिनिट में काम तमाम नहीं किया …. समझा ना”

“हां सर … सॉरी सर अब नहीं मचलूंगा.” कहकर मैं चुपचाप बैठ गया और मजा लेने लगा. बस कभी कभी अत्याधिक आनंद से मेरी हिचकी निकल

सर ने दस मिनिट और हर तरह से मेरी मुठ्ठ मारी. फ़िर पूछा “सबसे अच्छा क्या लगा बता … कौनसा तरीका पसंद आया?”

“सर सब अच्छे हैं सर … पर जब आप मुठ्ठी में लेकर अंगूठे को सुपाड़े के नीचे से दबाते हैं तो … हां सर … ओह … ओह .. ऐसे ही …. तो झड़ने को आ जाता हूं सर … हां… ओह … ओह” मैं सिसक उठा.

सर ने मेरी उंगली मूंह में ली और चूसी. फ़िर बोले “अब तू ये अपनी गांड में कर. अच्छा ठहर, पहले जरा …”उन्होंने वहां पड़ी नारियल की तेल की शीशी में से तेल मेरी उंगली पर लगाया और बोले “इसे धीरे धीरे अपने छेद पर लगा और उंगली डाल अंदर” शीशी के पास एक छोटी कुप्पी भी रखी थी. मुझे समझ में नहीं आया कि ये कुप्पी यहां क्यों है.

मैंने अपने गुदा में उंगली डाली. शुरू में जरा सा दर्द हुआ पर फ़िर मजा आ गया. क्या मखमली थी मेरी गांड अंदर से. मेरा लंड और तन्ना गया. सर मुसकराये “मजा आया ना? अब उंगली करता रह, मैं तुझे झड़ाता हूं, बहुत देर हो गयी है. यह सच है कि कंट्रोल करना चाहिये पर लंड को बहुत ज्यादा भी तड़पाना नहीं चाहिये” और मेरी मुठ्ठ मारने लगे. मैंने अपनी गांड में जोर से उंगली की और एक मिनिट में तड़प के झड़ गया “ओह … ओह … हाय सर … मर गया सर … उई मां ऽ ”

सर ने मेरे उछलते सुपाड़े के सामने अपनी हथेली रखी और मेरा सारा वीर्य उसमें इकठ्ठा कर लिया. लंड शांत होने पर मुझे हथेली दिखाई. मेरे सफ़ेद गाढ़े वीर्य से वो भर गयी थी.

“ये देख अनिल … ये प्रसाद है काम देव का … खास कर तेरे जैसे सुंदर नौजवान का वीर्य याने तो ये मेवा है मेवा. समझा ना? जो ये मेवा खायेगा वो बड़ा भाग्यशाली होगा. अब मैं ही इसे पा लेता हूं, आखिर मेरी मेहनत है … ठीक है ना… ”
सर जीभ से मेरा वीर्य चाट चाट कर खाने लगे.
मुझे बिस्तर पर सुला कर मेरा झड़ा लंड सर ने प्यार से मुंह में लिया और चूसने लगे. एक हाथ बढ़ाकर उन्होंने थोड़ा नारियल तेल अपनी उंगली पर लिया और मेरे गुदा पर चुपड़ा. फ़िर मेरा लंड चूसते हुए धीरे से अपनी उंगली मेरी गांड में आधी डाल दी.

“ओह … ओह ..” मेरे मुंह से निकला.

“क्या हुआ, दुखता है?” चौधरी सर ने पूछा.

“हां सर … कैसा तो भी होता है”

“इसका मतलब है कि दुखने के साथ मजा भी आता है, है ना? यही तो मैं सिखाना चाहता हूं अब तुझे. गांड का मजा लेना हो तो थोड़ा दर्द भी सहना सीख ले” कहकर सर ने पूरी उंगली मेरी गांड में उतार दी और हौले हौले घुमाने लगे. पहले दर्द हुआ पर फ़िर मजा आने लगा. लंड को भी अजीब सा जोश आ गया और वो खड़ा हो गया. सर उसे फ़िर से बड़े प्यार से चूमने और चूसने लगे “देखा? तू कुछ भी कहे या नखरे करे, तेरे लंड ने तो कह दिया कि उसे क्या लुत्फ़ आ रहा है”

पांच मिनिट सर मेरी गांड में उंगली करते रहे और मैं मस्त होकर आखिर उनके सिर को अपने पेट पर दबा कर उनका मुंह चोदने की कोशिश करने लगा.
सर मेरे बाजू में लेट गये, उनकी उंगली बराबर मेरी गांड में चल रही थी. मेरे बाल चूम कर बोले “अब बता अनिल बेटे, जब औरत को प्यार करना हो तो उसकी चूत में लंड डालते हैं या उसे चूसते हैं. है ना? अब ये बता कि अगर एक पुरुष को दूसरे पुरुष से प्यार करना हो तो क्या करते हैं?”

“सर … लंड चूसकर प्यार करते हैं?” मैंने कहा.

“और अगर और कस कर प्यार करना हो तो? याने चोदने वाला प्यार?” सर ने मेरे कान को दांत से पकड़कर पूछा. मुझे बड़ा अच्छा लग रहा था.

“सर, गांड में उंगली डालते हैं, जैसा मैंने किया था और आप कर रहे हैं”

“अरे वो आधा प्यार हुआ, करवाने वाले को मजा आता है. पर लंड में होती गुदगुदी को कैसे शांत करेंगे?”

मैं समझ गया. हिचकता हुआ बोला “सर … गांड में …. लंड डाल कर सर?”

“बहुत अच्छे मेरी जान. तू समझदार है. अब देख, तू मुझे इतना प्यारा लगता है कि मैं तुझे चोदना चाहता हूं. तू भी मुझे चोदने को लंड मुठिया रहा है. अब अपने पास चूत तो है नहीं, पर ये जो गांड है वो चूत से ज्यादा सुख देती है. और चोदने वाले को भी जो आनद आता है वो …. बयान करना मुश्किल है बेटे. अब बोल, अगला लेसन क्या है? तेरे सर अपने प्यारे स्टूडेंट को कैसे प्यार करेंगे?”

“सर … मेरी गांड में अपना लंड डाल कर …. ओह सर …” मेरा लंड मस्ती में उछला क्योंकि सर ने अपनी उंगली सहसा मेरी गांड में गहराई तक उतार दी.

“सर दर्द होगा सर …. प्लीज़ सर ” मैं मिन्नत करते हुए बोला. मेरी आंखों में देख कर सर मेरे मन की बात समझ गये “तुझे करवाना भी है ऐसा प्यार और डर भी लगता है, है ना?”

“हां सर, आपका बहुत बड़ा है” मैंने झिझकते हुए कहा.

“अरे उसकी फ़िकर मत कर, ये तेल किस लिये है, आधी शीशी डाल दूंगा अंदर, फ़िर देखना ऐसे जायेगा जैसे मख्खन में छुरी. और तुझे मालूम नहीं है, ये गांड लचीली होती है, आराम से ले लेती है. और देख, मैंने पहले एक बार अपना झड़ा लिया था, नहीं तो और सख्त और बड़ा होता. अभी तो बस प्यार से खड़ा है, है ना? और चाहे तो तू भी पहले मेरी मार सकता है.”

मेरा मन ललचा गया. सर हंस कर बोले “मारना है मेरी? वैसे मैं तो इसलिये पहले तेरी मारने की कह रहा था कि तेरा लंड इतना मस्त खड़ा है, इस समय तुझे असली मजा आयेगा इस लेसन का. गांड को प्यार करना हो तो अपने साथी को मस्त करना जरूरी होता है, समझा ना? लंड खड़ा है तेरा तो मरवाने में बड़ा मजा आयेगा तेरे को”

“हां सर.” सर मुझे इतने प्यार से देख रहे थि कि मेरा मन डोलने लगा ” सर … आप … डाल दीजिये सर अंदर, मैं संभाल लूंगा”

“अभी ले मेरे राजा. वैसे तुम्हें कायदे से कहना चाहिये कि सर, मार लीजिये मेरी गांड!”

“हां सर …. मेरी गांड मारिये सर …. मुझे …. मुझे चोदिये सर

सर मुस्कराये “अब हुई ना बात. चल पलट जा, पहले तेल डाल दूं अंदर. तुझे मालूम है ना कि कार के एंजिन में तेल से पिस्टन सटासट चलता है? बस वैसे ही तेरे सिलिंडर में मेरा पिस्टन ठीक से चले इसलिये तेल जरूरी है. अच्छा पलटने के पहले मेरे पिस्टन में तो तेल लगा”

मैंने हथेली में नारियल का तेल लिया और चौधरी सर के लंड को चुपड़ने लगा. उनका खड़ा लंड मेरे हाथ में नाग जैसा मचल रहा था. तेल चुपड़ कर मैं पलट कर सो गया. डर भी लग रहा था. तेल लगाते समय मुझे अंदाजा हो गया था कि सर का लंड फ़िर से कितना बड़ा हो गया है. सर ने भले ही दिलासा देने को यह कहा था कि एक बार झड़कर उनका जरा नरम खड़ा रहेगा पर असल में वो लोहे की सलाख जैसा ही टनटना गया था.

सर ने तेल में उंगली डुबो के मेरे गुदा को चिकना किया और एक उंगली अंदर बाहर की. फ़िर एक हाथ से मेरे चूतड फ़ैलाये और कुप्पी उठाकर उसकी नली धीरे से मेरी गांड में अंदर डाल दी. मैं सर की ओर देखने लगा.

वे मुस्कराकर बोले “बेटे, अंदर तक तेल जाना जरूरी है. मैं तो भर देता हूं आधी शीशी अंदर जिससे तुझे कम से कम तकलीफ़ हो.” वे शीशी से तेल कुप्पी के अंदर डालने लगे.

मुझे गांड में तेल उतरता हुआ महसूस हुआ. बड़ा अजीब सा पर मजेदार अनुभव था. सर ने मेरी कमर पकड़कर मेरे बदन को हिलाया “बड़ी टाइट गांड है रे तेरी, तेल धीरे धीरे अंदर जा रहा है”
मेरी गांड से कुप्पी निकालकर सर ने फ़िर एक उंगली डाली और घुमा घुमाकर गहरे तक अंदर बाहर करने लगे. मैंने दांतों तले होंठ दबा लिये कि सिसकारी न निकल जाये. फ़िर सर ने दो उंगलियां डाली. इतना दर्द हुआ कि मैं चिहुक पड़ा.

“इतने में तू रिरियाने लगा तो आगे क्या करेगा? मुंह में कुछ ले ले जिससे चीख न निकल जाये. क्या लेगा बोल?” सर ने पूछा. मुझे समझ में नहीं आया कि क्या कहूं. मेरी नजर वहां पलंग के नीचे पड़ी सर की हवाई चप्पल पर गयी.

सर बोले “अच्छा ये बात है? शौकीन लगता है तू! कल से देख रहा हूं कि तेरी नजर बार बार मेरी चप्पलों पर जाती है. तुझे पसंद हैं क्या?”

मैं शरमाता हुआ बोला “हां सर, बहुत प्यारी सी हैं, नरम नरम.”

“तो मेरी चप्पल ले ले, ” सर ने कहा.

सर ने अपनी चप्पल उठाई और मेरे मुंह में दे दी. “ठीक से पकड़ ले, थोड़ी अंदर ले कर, मुंह भर ले, जब दर्द हो तो चबा लेना. ठीक है ना? तुझे शौक है इनका ये अच्छी बात है, मुंह में लेकर देख क्या लुत्फ़ आयेगा!”

मैंने मूंडी हिलाई और  हवाई चप्पल मुंह में ले ली. लंड तन्ना गया था, नरम नरम रबर की मुलायम चप्पल की भीनी भीनी खुशबू से मजा आ रहा था.

“अब पलट कर लेट जा, आराम से. वैसे तो बहुत से आसन हैं और आज तुझे सब आसनों की प्रैक्टिस कराऊंगा. पर पहली बार डालने को ये सबसे अच्छा है” मेरे पीछे बैठते हुए सर बोले.

सर ने मेरे चेहरे के नीचे एक तकिया दिया और अपने घुटने मेरे बदन के दोनों ओर टेक कर बैठ गये. “अब अपने चूतड़ पकड़ और खोल, तुझे भी आसानी होगी और मुझे भी. और एक बात है बेटे, गुदा ढीला छोड़ना नहीं तो तुझे ही दर्द होगा. समझ ले कि तू लड़की है और अपने सैंया के लिये चूत खोल रही है, ठीक है ना?”

मैंने अपने हाथ से अपने चूतड़ पकड़कर फ़ैलाये. सर ने मेरे गुदा पर लंड जमाया और पेलने लगे “ढीला छोड़ अनिल, जल्दी!”

मैंने अपनी गांड का छेद ढीला किया और अगले ही पल सर का सुपाड़ा पक्क से अंदर हो गया. मेरी चीख निकलते निकलते रह गयी. मैंने मुंह में भरी चप्पल दांतों तले दबा ली और किसी तरह चीख निकलने नहीं दी. बहुत दर्द हो रहा था.

सर ने मुझे शाबासी दी “बस बेटे बस, अब दर्द नहीं होगा. बस पड़ा रह चुपचाप” और एक हाथ से मेरे चूतड़ सहलाने लगे. दूसरा हाथ उन्होंने मेरे बदन के नीचे डाल कर मेरा लंड पकड़ लिया और उसे आगे पीछे करने लगे. मैं चप्पल चबाने की कोशिश कर रहा था.

“अरे खा जायेगा क्या?” सर ने हंस कर कहा. फ़िर बोले “कोई बात नहीं बेटे, मन में आये वैसे कर, मस्ती कर. हम और ले आयेंगे तेरे लिये”
दो मिनिट में जब दर्द कम हुआ तो मेरा कसा हुआ बदन कुछ ढीला पड़ा और मैंने जोर से सांस ली. सर समझ गये. झुक कर मेरे बाल चूमे और बोले “बस अनिल, अब धीरे धीरे अंदर डालता हूं. एक बार तू पूरा ले ले, फ़िर तुझे समझ में आयेगा कि इस लेसन में कितना आनंद आता है” फ़िर वे हौले हौले लंड मेरे चूतड़ों के बीच पेलने लगे. दो तीन इंच बाद जब मैं फ़िर से थोड़ा तड़पा तो वे रुक गये. मैं जब संभला तो फ़िर शुरू हो गये.

पांच मिनिट बाद उनका पूरा लंड मेरी गांड में था. गांड ऐसे दुख रही थी जैसे किसीने हथौड़े से अंदर से ठोकी हो. सर की झांटें मेरे चूतड़ों से भिड़ गयी थीं. सर अब मुझ पर लेट कर मुझे चूमने लगे. उनके हाथ मेरे बदन के इर्द गिर्द बंधे थे और मेरे निपलों को हौले हौले मसल रहे थे.
सर बोले “दर्द कम हुआ अनिल बेटे?”

मैंने मुंडी हिलाकर हां कहा. सर बोले “अब तुझे प्यार करूंगा, मर्दों वाला प्यार. थोड़ा दर्द भले हो पर सह लेना, देख मजा आयेगा” और वे धीरे धीरे मेरी गांड मारने लगे. मेरे चूतड़ों के बीच उनका लंड अंदर बाहर होना शुरू हुआ और एक अजीब सी मस्ती मेरी नस नस में भर गयी. दर्द हो रहा था पर गांड में अंदर तक बड़ी मीठी कसक हो रही थी.

एक दो मिनिट धीरे धीरे लंड अंदर बाहर करने के बाद मेरी गांड में से ’सप’ ’सप’ ’सप’ की आवाज निकलने लगी. तेल पूरा मेरे छेद को चिकना कर चुका था. मैं कसमसा कर अपनी कमर हिलाने लगा. चौधरी सर हंसने लगे “देखा, आ गया रास्ते पर. मजा आ रहा है ना? अब देख आगे मजा” फ़िर वे कस के लंड पेलने लगे. सटा सट सटा सट लंड अंदर बाहर होने लगा. दर्द हुआ तो मैंने फ़िर से चप्पल चबा ली पर फ़िर अपने चूतड़ उछाल कर सर का साथ देने लगा.

सर ने चप्पल मेरे मुंह से निकाल दी. “अब इसकी जरूरत नहीं है अनिल. बता …. आनंद आया या नहीं?”

“हां ….सर … आप का … लेकर बहुत …. मजा …. आ …. रहा …. है ….” सर के धक्के झेलता हुआ मैं बोला ” सर …. आप … को …. कैसा …. लगा …. सर?”

“अरे राजा तेरी मखमली गांड के आगे तो गुलाब भी नहीं टिकेगा. ये तो जन्नत है जन्नत मेरे लिये … ले … ले … और जोर …. से करूं ….” वे बोले.

“हां …. सर … जोर से …. मारिये …. सर …. बहुत …. अच्छा लग … रहा है …. सर”

सर मेरी पांच मिनिट मारते रहे और मुझे बेतहाशा चूमते रहे. कभी मेरे बाल चूमते, कभी गर्दन और कभी मेरा चेहरा मोड कर अपनी ओर करते और मेरे होंठ चूमने लगते. फ़िर वे रुक गये.

मैंने अपने चूतड़ उछालते हुए शिकायत की “मारिये ना सर … प्लीज़”

“अब दूसरा आसन. भूल गया कि ये लेसन है? ये तो था गांड मारने का सबसे सीदा सादा और मजेदार आसन. अब दूसरा दिखाता हूं. चल उठ और ये सोफ़े को पकड़कर झुक कर खड़ा हो जा” सर ने मुझे बड़ी सावधानी से उठाया कि लंड मेरी गांड से बाहर न निकल जाये और मुझे सोफ़े को पकड़कर खड़ा कर दिया. “झुक अनिल, ऐसे सीधे नहीं, अब समझ कि तू कुतिया है …. या घोड़ी है … और मैं पीछे से तेरी मारूंगा”

मैं झुक कर सोफ़े के सहारे खड़ा हो गया. सर मेरे पीछे खड़े होकर मेरी कमर पकड़कर फ़िर पेलने लगे. आगे पीछे आगे पीछे. सामने आइने में दिख रहा था कि कैसे उनका लंड मेरी गांड में अंदर बाहर हो रहा था. देख कर मेरा और जोर से खड़ा हो गया. मस्ती में आकर मैंने एक हाथ सोफ़े से उठाया और लंड पकड़ लिया. सर पीछे से पेल रहे थे, धक्के से मैं गिरते गिरते बचा.

“चल.. जल्दी हाथ हटा और सोफ़ा पकड़ नहीं तो तमाचा मारूंगा” सर चिल्लाये.

“सर … प्लीज़… रहा नहीं जाता ….. मुठ्ठ मारने का मन …. होता है” मैं बोला.

“अरे मेरे राजा मुन्ना, यही तो मजा है, ऐसी जल्दबाजी न कर, पूरा लुत्फ़ उठा. ये भी इस लेसन का एक भाग है” सर प्यार से बोले. “और अपने लंड को कह कि सब्र कर, बाद में बहुत मजा आयेगा उसे”

सर ने खड़े खड़े मेरी दस मिनिट तक मारी. उनका लंड एकदम सख्त था. मुझे अचरज हो रहा था कि कैसे वे झड़े नहीं. बीच में वे रुक जाते और फ़िर कस के लंड पेलते. मेरी गांड में से ’फ़च’ ’फ़च’ ’फ़च’ की आवाज आ रही थी.

फ़िर सर रुक गये. बोले “थक गया बेटे? चल थोड़ा सुस्ता ले, आ मेरी गोद में बैठ जा. ये है तीसरा आसन, आराम से प्यार से चूमाचाटी करते हुए करने वाला” कहकर वे मुझे गोद में लेकर सोफ़े पर बैठ गये. लंड अब भी मेरी गांड में धंसा था.

मुझे बांहों में लेकर सर चूमा चाटी करने लगे. मैं भी मस्ती में था, उनके गले में बांहें डाल कर उनका मुंह चूमने लगा और जीभ चूसने लगा. सर धीरे धीरे ऊपर नीचे होकर अपना लंड नीचे से मेरी गांड में अंदर बाहर करने लगे.

पांच मिनिट आराम करके सर बोले “चल अनिल, अब मुझसे भी नहीं रहा जाता, क्या करूं, तेरी गांड है ही इतनी लाजवाब, देख कैसे प्यार से मेरे लंड को कस के जकड़े हुए है, आ जा, इसे अब खुश कर दूं, बेचारी मरवाने को बेताब हो रहा है, है ना?”

मैं बोला “हां सर” मेरी गांड अपने आप बार बार सिकुड़ कर सर के लंड को गाय के थन जैसा दुह रही थी.

“चलो, उस दीवार से सट कर खड़े हो जाओ” सर मुझे चला कर दीवार तक ले गये. चलते समय उनका लंड मेरी गांड में रोल हो रहा था. मुझे दीवार से सटा कर सर ने खड़े खड़े मेरी मारना शुरू कर दी. अब वे अच्छे लंबे स्ट्रोक लगा रहे थे, दे दनादन दे दनादन उनका लंड मेरे चूतड़ों के बीच अंदर बाहर हो रहा था.

थोड़ी देर में उनकी सांस जोर से चलने लगी. उन्होंने अपने हाथ मेरे कंधे पर जमा दिये और मुझे दीवार पर दबा कर कस कस के मेरी गांड चोदने लगे. मेरी गांड अब ’पचाक’ पचाक’ ’पचाक’ की आवाज कर रही थी. दीवार पर बदन दबने से मुझे दर्द हो रहा था पर सर को इतना मजा आ रहा था कि मैंने मुंह बंद रखा और चुपचाप मरवाता रहा. चौधरी सर एकाएक झड़ गये और ’ओह … ओह … अं … आह ….” करते हुए मुझसे चिपट गये. उनका लंड किसी जानवर जैसा मेरी गांड में उछल रहा था. सर हांफ़ते हांफ़ते खड़े रहे और मुझपर टिक कर मेरे बाल चूमने लगे.

पूरा झड़ कर जब लंड सिकुड़ गया तो सर ने लंड बाहर निकाला. फ़िर मुझे खींच कर बिस्तर तक लाये और मुझे बांहों में लेकर लेट गये और चूमने लगे “अनिल बेटे, बहुत सुख दिया तूने आज मुझे, बहुत दिनों में मुझे इतनी मतवाली कुवारी गांड मारने मिली है, आज तो दावत हो गयी मेरे लिये. मेरा आशिर्वाद है तुझे कि तू हमेशा सुख पायेगा, इस क्रिया में मेरे से ज्यादा आगे जायेगा. तुझे मजा आया? दर्द तो नहीं हुआ ज्यादा?”

सर के लाड़ से मेरा मन गदगद हो गया. मैं उनसे चिपट कर बोला “सर …. बहुत मजा आया सर …. दर्द हुआ …. आप का बहुत बड़ा है सर … लग रहा था कि गांड फ़ट जायेगी … फ़िर भी बहुत मजा आ रहा था सर”

सर ने मेरे गुदा को सहलाकर कहा “देख, कैसे मस्त खुल गया है तेरा छेद, अब तकलीफ़ नहीं होगी तुझे, मजे से मरवायेगा. अब तू कुंवारा नहीं है” फ़िर मेरा लंड पकड़कर बोले “मजा आ रहा है?”

“सर …. अब नहीं रहा जाता प्लीज़ …. मर जाऊंगा …. अब …. अब कुछ करने दीजिये सर” कमर हिला हिला कर सर के हाथ में अपना लंड आगे पीछे करता हुआ मैं बोला.

“हां बात तो सच है … तू ज्यादा देर नहीं टिकेगा अब. बोल चुसवायेगा या ….. चोदेगा?”

“सर चोदूंगा …. हचक हचक के चोदूंगा” मैं मचल कर बोला.
वे अब पलट गये थे और उनकी भरे पूरे चूतड़ मेरे सामने थे. मेरी नजर उनपर गड़ी थी.

“सर … अगर आप … नाराज न हों तो … सर ….” मैं धीरे से बोला.

“हां हां … कहो मेरे बच्चे … घबराओ मत” सर मुझे पुचकार कर बोले.

“सर …. आप की गांड मारने का जी हो रहा है”

सर हंस कर बोले “अरे तो दिल खोल कर बोल ना, डरता क्यों है? यही तो मैं सुनना चाहता था. वैसे मेरी गांड तेरे जितनी नाजुक नहीं है”

“सर बहुत मस्त है सर … मोटी मोटी … गठी हुई … मांसल … प्लीज़ सर”

“तो आ जा. पर एक शर्त है. दो तीन मिनिट में नहीं झड़ना, जरा मस्ती ले ले कर दस मिनिट मारना. मुझे भी तो मजा लेने दे जरा. ठीक है ना? समझ ले यही तेरा एग्ज़ाम है, दस मिनिट मारेगा तो पास नहीं तो फ़ेल” सर बोले.

“हां सर …. मेरा बस चले तो घंटा भर मारूं सर” सर के चूतड़ों को पकड़कर मैं बोला.

वे मुस्कराये और पेट के बल लेट गये. “थोड़ी उंगली कर पहले, तेल लगा ले. मजा आता है उंगली करवाने में”
मैंने उंगली पर तेल लिया और सर की गांड में डाल दिया. गरम गरम मुलायम गांड थी चौधरी सर की. मैं उंगली इधर उधर घुमाने लगा “हां …. ऐसे ही … जरा गहरे …. वो बाजू में …. हां बस … ऐसे ही …” सर गुनगुना उठे. मैंने दो तीन मिनिट और उंगली की पर फ़िर रहा नहीं गया, झट से सर पर चढ़कर उनकी गांड में लंड फ़ंसाया और पेल दिया. लंड आसानी से अंदर चला गया.

“अच्छी है ना? तेरे जितनी अच्छी तो नहीं होगी, तू तो एकदम कली जैसा है” सर बोले.

“नहीं सर, बहुत अच्छा लग रहा है … ओह …. आह” मेरे मुंह से निकल गया, सर ने गुदा सिकोड़कर मेरे लंड को कस के पकड़ लिया था.

“अब मार … कस के मारना, धीरे धीरे की कोई जरूरत नहीं है” सर कमर हिला कर बोले.

मैं सर की मारने लगा. पहले वैसे ही झुक कर बैठे बैठे मारी पर फ़िर उनपर लेट गया और उनके बदन से चिपट कर मारने लगा. सर की चौड़ी पीठ मेरे मुंह के सामने थी, उसे चूमता हुआ मैं जोर जोर से चोदने लगा.  मेरी सांस चलने लगी तो सर डांट कर बोले “संभाल के … संभाल के … फ़ेल हो जायेगा तो आज उसी बेंत से मार खायेगा”

मैं रुक गया और फ़िर संभलने के बाद फ़िर से सर को चोदने लगा. सर भी मूड में थे. अपने चूतड़ उछाल उछाल कर मेरा साथ दे रहे थे “ऐसे ही अनिल …. बहुत अच्छे ….. लगा धक्का जोर से …. गांड मारते समय कस के मारनी चाहिये …. ऐसे नहीं जैसे नयी दुल्हन को हौले हौले चोद रहा हो … ऐर चोदना चाहिये जैसे किसी रंडी को पैसे वसूल करने के लिये चोदते हैं … समझा ना? ….फ़िर मार जोर से ….. हां …. बहुत मस्त मार रहा है तू” मेरे हाथ पकड़कर उन्होंने अपनी छाती पर रख लिये. मैं इशारा समझ कर उनके निपल मसलता हुआ उनकी गांड मारने लगा. बीच में हाथ से मैंने उनका लंड पकड़ा तो वो फ़िर से सख्त हो गया था.

किसी तरह मैंने दस मिनिट निकाले. फ़िर बोला “सर … प्लीज़ सर … अब …”

सर बोले “ठीक है, पहली बार है उसके हिसाब से अच्छा किया है तूने. पर आगे याद रखना. अपने सर की सेवा ठीक से करना. तेरे सर की ये गांड तुझे मजा भी खूब लूटने देगी.” मैं कस के सर की गांड पर पिल पड़ा और उसे चोद चोद कर अपना वीर्य उनकी गांड में उगल दिया. फ़िर हम वैसे ही पड़े रहे, चूमा चाटी करते.

में पेट के बल लेटने लगा तो सर बोले “अरे वो आसन तो हो गया, अब सामने वाला,, वैसे. इसलिये तो तुझे देखने को कहा था मूरख, भूल गया? सीधा लेटो. तू भूल जायेगा कि तेरी गांड मार रहा हूं, तुझे भी यही लगेगा कि तेरी चूत चोद रहा हूं. ये अपने पैर मोड़ो बेटे, और ऊपर … उठा लो ऊपर … और ऊपर …. अपने सिर तक …. हां अब ठीक है”

मैंने टांगें उठाईं. सर ने उन्हें मोड कर मेरे टखने मेरे कानों के इर्द गिर्द जमा दिये. कमर दुख रही थी. “अब इन्हें पकड़ो और मुझे अपना काम करने दो” कहकर सर मेरे सामने बैठ गये और लंड मेरी पूरी खुली गांड पर रखकर पेलने लगे. पक्क से लंड आधा अंदर गया. मैंने सिर्फ़ जरा सा सी सी किया, और कुछ नहीं बोला.

“शाबास बेटे, अब तू पूरा तैयार हो गया है, देखा जरा सा भी नहीं चिल्लाया मेरा लंड लेने में. कमर दुखती है क्या ऐसे टांगें मोड़ कर?”

“हां सर” मैंने कबूल किया.

“पहली बार है ना! आदत हो जायेगी. ये आसन बड़ा अच्छा है कमर के लिये, योगासन जैसा ही है. तेरी कमर लड़कियों से ज्यादा लचीली हो जायेगी देखना. अब ये ले पूरा ….” कहकर उन्होंने सधा हुआ जोर लगाया और लंड जड़ तक मेरे चूतड़ों के बीच उतार दिया. एक दो बार वैसे ही उन्होंने लंड अंदर बाहर किया और फ़िर सामने से मेरे ऊपर लेट गये.

मैंने थोड़ा ऊपर उठकर सर की पीठ को बांहों में भींच लिया और अपने पैर उनकी कमर के इर्द गिर्द लपेट लिये. बहुत अच्छा लग रहा था सर के सुडौल बदन से ऐसे आगे से चिपटकर. मेरा लंड उनके पेट और मेरे पेट के बीच दब गया था.

सर ने प्यार से मुझे चूमा और चोदने लगे. “अच्छा लग रहा है अनिल? या तुझे अनू कहूं. अनिल, थोड़ी देर को समझ ले कि तू लड़की है और चूत चुदा रही है” फ़िर मेरे गाल और आंखें चूमने लगे. वे मुझे हौले हौले चोद रहे थे, बस दो तीन इंच लंड बाहर निकालते और फ़िर अंदर पेलते.

कुछ देर मैं पड़ा पड़ा चुपचाप गांड चुदवाता रहा. फ़िर कमर का दर्द कम हुआ और मेरी गांड ऐसी खिल उठी जैसे मस्ती में पागल कोई चूत. गांड के अंदर मुझे बड़ी मीठी मीठी कसक हो रही थी. जब सर का सुपाड़ा मेरी गांड की नली को घिसता तो मेरी नस नस में सिहरन दौड़ उठती. मेरा लंड भी मस्ती में था, बहुत मीठी मीठी चुभन हो रही थी. मुझे लगा कि लड़कियों के क्लिट में कुछ ऐसा ही लगता होगा.

सर पर मुझे खूब प्यार आने लगा वैसा ही जैसे किसी लड़की को अपने आशिक से चुदवाने में आता होगा. मैंने उन्हें जम के अपनी बांहों में भींचा और बेतहाशा उन्हें चूमने लगा “सर …. मेरे अच्छे सर …. बहुत अच्छा लग रहा है सर….. चोदिये ना …. कस के चोदिये ना …. फ़ाड दीजिये मेरी गां …. चूत …. मेरी चूत को ढीला कर दीजिये सर ….. ओह सर … आप अब जो कहेंगे मैं … करूंगा सर …. आप …. आप मेरे भगवान हैं सर ….सर मैं आप को बहुत प्यार करता हूं सर …. सर …. आप को मैं अच्छा लगता हूं ना सर” और कमर उछाल उछाल कर मैं अपनी गांड में सर के लंड को जितना हो सकता है उतना लेने की कोशिश करने लगा.

सर मुझे चूम कर मेरी गांड में लंड पेलते हुए बोले “हां अनू रानी, मैं तुझे प्यार करता हूं. बहुत प्यारी है तू. तूने मुझे बहुत सुख दिया है. अब आगे देखना कि किस तरह से मैं तुझे चोदूंगा.”
सर ने मुझे खूब देर चोदा. हचक हचक कर धक्के लगाये और मेरी कमर करीब करीब तोड़ दी.

सर ने लंड मेरी गांड से निकाला और प्यार से मेरे मुंह में दे दिया “ले अनू रानी …. ऐश कर … मेहनत का फ़ल चख”

Comments


Online porn video at mobile phone


gay lund xxxdesi mature unckel fuckmom ko plan banake khub maza liya sex storydesi boy nude cocknude desi gAy videodesi gay fucking naked picnude gay desi picgaysex lungigand phad gay sexdesi hairy guys nudePorn desi gays khaniyadesi chaddi gand picsdesi gay big dickmalayolddaddy.blogspot.comsexy,hoty indian gay sexkapde utarne se lekar full naked sexindian nude gayIndia man nakedreal desi dickmeri gand faddalo raja hindimeIndian dickChennai nude gayDesi gay model pornओल्ड पापा और बेटा सेक्सी गे कहानीहिंदी कहानी गे हिंदी कहानी आह आह आह आह आह आह आहIndian gaysitesexhindigaysexstory intrainindian gay nude photoRanbir gay cockIndia Tamil gay Actor Naked imageSex badi sex papagay indian fuck giflungi man nudeNaked sexy desi gay sexdicks and cocks out of lungies and towelsgays fuck gallery indiankerala gay nakedìndian gay sex nude desi mard ka cock lundnude indian landnude indian gay boys porn imagescache:YL00Kd_JPAMJ:porogi-canotomotiv.ru/friends/indian-gay-sex-story-sex-sex-sex-2/ boy lund pic sex photosbigcolkmendasi indian homosex boys eating cum videoindean man ka. lamba land sexy photo nuderoommate in night fuck hinglish storieslangot man nudeआदमीका लिँग कितना लम्बा चौडा होताहैindiangaysitedesi gay porn mature video sex gay desi gand photonude indian manguthe videos xxxदेसी लुंड तुमब्लरsexgayssouthindianIndianlungigaysexIndian daddy nude picsdesi mard Sexmama bhanja gay chudailong indian cockgrandphather gaysex kahaniya hindidesi gay kahaniindian old gay pornfamily sex confession kahanideshi shocke sexlungi sex boy menindian nude man penishot telugu gay sex storiespanice sexगांड मIndian boys showing dickhairy uncle nudeDesi indiyan boys sexy gaydesi hot old cockpicindian man nude fucknaked desi gayFuck indian mardmale to male fucking desi boyXxx inDin sa p i ya comIndian police cockIndian pahlwan sexs gay man. comdesi gay pennis massage unut cockbaap bete ki gay sex storyxxxxxxwwwwwwwww.gay indian nude..indian gay asshole picsindian gay blowjobindian gay xvideoindian gay lungi cock pornIndian uncle ki chudai gay storieskaajal-desi-gay-love-story-part- 3sexy hunk desi nude pic