Hindi Gay sex story – बाप का पाप


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बाप का पाप

दोस्तो मेरा नाम अंकित है और मैं मेरे घर में सबके साथ चुदाई कर चुका हूँ.मैं पूरा सोलह साल का हो चुका हूँ .जब मैं बारह साल का था तब भी शारीरिक रिश्ते को समझता था. एक बार पापा को मम्मी को चोदते देखा तो इतना मज़ा आया का रोज़ देखने लगा. मैं पापा की चुदाई देख इतना मस्त हुआ था की अपने पापा को फंसाने का जाल बुनने लगा .हम दोनों एक दुसरे से काफी खुले हुए हैं.एक दुसरे के सामने नंगे नहा भी लिया करते थे.कई बार उन्होंने मुझे उनके लंड को देखते हुए ताड़ भी लिया था. मैंने उन्हें हिंट देना शुरू किया. अब जब भी मौक़ा मिलता, पापा की गोद में बैठ उनसे चूमा चाट करने लगा. इधर उधर हाथ रखने के बहाने उनके लंड पे हाथ रख देता.वो भी मुझे गोद में बिठाके अपने हाथ इस तरह रख देते के उनके हाथ ठीक मेरे लंड के ऊपर होते.मैं उस समय अपने चूतड के नीचे उनके लंड को हिलता हुआ महसूस कर सकता था.पर अभी तक केवल उनके लंड को ही दबा पाया था, पूरा मज़ा नही लिया था. मम्मी हर समय घर पर ही रहती थी और हम कभी अकेले नहीं हो पाते थे. और आख़िर एक दिन कामयाबी मिल ही गयी. पापा को मैने फँसा ही लिया.मेरे मामा की शादी थी इसलिए मम्मी अपने मायके जा रही थी. रात मैं पापा ने मुझे अपनी गोद मैं खड़े लंड पे बिठाकर कहा था “बेटे, कल तेरी मम्मी चली जाएगी .फिर तुझे कल पूरा मज़ा देकर जवान होने का मतलब बताएँगे.”

मैं पापा की बात सुन ख़ुश हो गया था. पापा अब अपने बेडरूम का कोई ना कोई विंडो खुली रखते थे जिससे मैं पापा को मम्मी को चोदते देख सकूँ. ऐसा मैने ही कहा था. फिर उस रात पापा ने मम्मी को एक कुर्सी पर बिठाकर
3 बार  चोदा फिर दोनो सो गये. अगले दिन मम्मी को जाना था.

आज मम्मी जा रहा थी.पापा ने मेरे कमरे में आ मेरी लंड को पकड़कर दो तीन बार मेरे होंट चूमे और लंड से मेरा लंड दबा के कहा “तुम्हारी मम्मी को स्टेशन छोड़कर आता हूँ.फिर आज रात तुमको पूरा मज़ा देंगे.”
मैं बड़ा ख़ुश था. पापा चले गये तो मैं घर में अकेला रह गया. मैं अपनी चड्डी उतार पापा की वापसी का इंतज़ार कर रहा था. मैंने सोचा के जब तक पापा नही आते अपनी गांड को पापा के लंड के लिए उंगली से फैला लूं.तभी किसी ने दरवाज़ा खटखटाया. मैने गांड में उंगली पेलते हुए पूछा, “कौन है?”
मैं हूँ उमेश. उमेश का नाम सुन मैं गुदगुदी से भर गया. उमेश मेरा 20 साल का पड़ोसी था. वो मुझे बड़े दिनों से फसाना चाह रहा था पर मैं उसे लाइन नही दे रहा था. वो रोज़ मुझे गंदे गंदे इशारे करता था और पास आ कभी कभी लंड दबा देता और कभी गांड पर हाथ फेर कहता के जानेमन बस एक बार चखा दो. आज अपनी गांड में उंगली पेल मैं बेताब हो गया था. आज उसके आने पर इतनी मस्ती छाई के बिना चड्डी पहने ही दरवाज़ा खोल दिया. मुझे उसके इशारो से पता चल चूका था के वो मुझे चोदना चाहता है.


आज मैं उससे चुदवाने को तैयार था. आज सुबह ही पापा ने मम्मी को कुर्सी पर बिठाकर चोदा था. मम्मी के भाई की शादी थी इसलिए वो एक सप्ताह के लिए गयी थी. पापा ने कहा था के आज पूरा मज़ा देंगे. इसके पहले पापा ने कई बार मेरी गदराई गांड को दबाकर मज़ा दिया था. मैं घर में अकेले चड्डी उतारकर अपनी गांड में उंगली पेलकर मज़ा ले रहा था जिससे जब पापा का मोटा लंड गांड में जाए तो दर्द  ना हो. उमेश के आने पर सोचा के जब तक पापा नही आते तब तक क्यों ना इसी से एक बार चुदवाकर मज़ा लिया जाए. यही सोचकर दरवाज़ा खोल दिया.
मैने जैसे ही दरवाज़ा खोला उमेश फ़ौरन अंदर आया और मुझे देखकर ख़ुश हो मेरी गांड को पकड़कर बोला, “हाए जान,बड़ा अच्छा मौक़ा है.” मैं उसका हरकत पर सनसना गया. उसने मेरी गांड को छोड़कर पलटकर दरवाज़ा बंद किया और मुझे अपनी गोद में उठा लिया और मेरे दोनो चूतड मसलते हुए मेरे होंटों को चूसने लगा और बोला, “हाए जान,तुम्हारी गांड तो बहुत टाइट हैं. हाए बहुत तडपाया है तुमने जान,आज ज़रूर चोदूंगा.”
“छोड़ दो पापा आ जाएँगे.”
“डरो नही मेरी जान बहुत जल्दी से छोड़ लूंगा. मेरा छोटा है. दर्द नही होगा.” वो मेरी गांड सहला कर बोला, “ चड्डी नही पहनी है, यह तो बहुत अच्छा है.” मैं तो अपने पापा से चुदवाने के जुगाड़ में ही नंगा बैठा था पर यह तो एक सुनहरा मौक़ा मिल गया था. मैं पापा से चुदवाने के लिए पहले से ही गरम था. जब उमेश मेरे निपल और गालो को मसलने लगा तो मैं पापा से पहले उमेश से मज़ा लेने को बेकरार हो गया. उसकी छेड़छाड़ में मज़ा आ रहा था. मेरी गांड पापा का लंड खाने से पहले उमेश का लंड खाने को बेताब हो गयी.मैं अपनी कमर लचकाता बोला, “उमेश जो करना हो जल्दी से कर लो कहीं पापा ना आ जाए.”
मैं पागल होती बोली तो उमेश मेरा इशारा पा मुझे बेड पर लिटा अपनी पेंट उतारने लगा. नंगा हो बोला, “जानेमन  बड़ा मज़ा आएगा. तुम एकदम तैयार माल हो. देखो मेरा लंड छोटा है ना.”
उसने मेरा हाथ अपने लंड पर रखा तो मैं उसके 4 इंच के खड़े लंड को पकड़ मस्त हो गया. इसका तो मेरे पापा से आधा था. मैं  उसका लंड सहलाता  बोला, “जो करना है जल्दी से कर लो.”
उमेश का लंड पकड़ते ही मेरा बदन कांपने लगा. पहले मैं डर रहा था पर लंड पकड़ मचल उठा. मेरे कहने पर वो मेरी टांगों के बीच आया और मेरी कसी कुँवारी गांड पर अपना छोटा लंड रख धक्का मारा. सूपड़ा कुच्छ से अंदर गया. फिर 3-4 धक्के मारकर पूरा लंड अंदर पेल दिया. कुछ देर बाद उसने धीरे धीरे चोदते हुए पूछा “मेरी जान, दर्द तो नही हो रहा है. मज़ा आ रहा है ना”
“मारो धक्के मज़ा आ रहा है.” मेरी बात सुन वो तेज़ी से धक्के मरने लगा. में उससे चुदवाते हुए मस्त हो रहा था. उसका चुदाई मुझे जन्नत की सैर करा रही थी. मैं नीचे से गांड उचकाता  सीसीयाते हुए बोला, “ उमेश ज़ोर ज़ोर से चोदो तुम्हारा लंड बहुत छोटा है. ज़रा ताक़त से चोदो राजा.” मेरी सुन उमेश ज़ोर ज़ोर से चोदने लगा. उसका छोटा लंड सकासक मेरी गांड में आ जा रहा था. मैं पहली बार चुद रहा था इसलिए उमेश के छोटे लंड से भी बहुत मज़ा आ रहा था. वो इसी तरह चोदते हुए मुझे जन्नत का मज़ा देने लगा. 10 मिनिट बाद वो मेरी छाती पर लुढ़क गया और कुत्ते का तरह हांफने लगा. उसके लंड से गरम, गरम पानी मेरी गांड में गिरने लगा. मैं पहली बार चुदा था और पहली बार गांड में लंड की मलाई गिरी थी  इसलिए मज़े से भर मैं उससे चिपक गया. मेरी गांड भी तपकने लगी . कुछ देर बाद हमलोग अलग हुए.
वो कपड़े पहन चला गया. मेरी गांड चिपचिपा गयी थी. उमेश मुझे चोदकर चला गया पर उसकी इस हिम्मत भरी हरकत से मैं मस्त था. उसने चोदकर बता दिया कि चुदवाने में बहुत मज़ा है. उमेश ठीक से चोद नही पाया था, बस ऊपर से गांड को रगड़ कर चला गया था पर मैं जान गया था कि चुदाई में अनोखा मज़ा है. उसके जाने पर मैने चड्डी पहन ली. मैं सोच रहा था कि जब उमेश के छोटे लंड से इतना मज़ा आया है तो जब पापा अपना मोटा तगड़ा लंड पेलेंगे तो कितना मज़ा आएगा. उमेश के जाने के 6-7 मिनिट बाद ही पापा स्टेशन से वापस आ गये. वो अंदर आते ही मेरे कड़े लंड को कुरते के ऊपर से पकड़ते हुए बोले, “आओ बेटे अब हम तुमको जवान होने का मतलब बताएँगे.”
“ओह पापा आप ने तो कहा था का रात को बताएँगे.”
“अरे अब तो मम्मी चली गयी हैं .अब हर समय रात ही है. मम्मी के कमरे में ही आओ. क्रीम लेती आना.” पापा मेरे लंड को मसलते हुए बोले. मैं उमेश से चुदकर जान ही चुका था. मैं जान गया कि क्रीम का क्या होगा पर अनजान बन बोला, “पापा क्रीम क्यों”
“अरे लेकर आओ तो बताएँगे.” पापा मेरे लंड को इतनी कसकर मसल रहे थे जैसे उखाड़ ही लेंगे. मैं क्रीम और टावल ले मम्मी के बेडरूम में पहुंचा . मैं बहुत ख़ुश था. जानता था कि क्रीम क्यों मंगाई है. उमेश से चुदने के बाद क्रीम का मतलब समझ गया था. पापा मुझे लड़के से गांडू बनाने के लिए बेकरार थे. मैं भी पापा का मोटा केला खाने के लिए तड़प रहा था. कमरे मैं पहुँचा तो पापा बोले, “बेटे क्रीम टेबल पर रखकर बैठ जाओ.”

मैं गुदगुदाते मन  से कुर्सी पर बैठ गया तो पापा मेरे पीछे आए और अपने दोनो हाथ मेरी कड़ी छाती पर लाए और दोनो निप्पल को प्यार से दबाने लगे. पापा के हाथ से निप्पलों को दबवाने में बड़ा मज़ा आ रहा था. तभी पापा ने अपने हाथ को गले के ऊपर से कुरते के अंदर डाल दिया और नंगी निप्पलों को दबाने लगे. मैं कुरते के नीचे कुछ  नही पहने था. पापा मेरी कड़ी कड़ी निप्पलों को उँगलियों में  भरकर दबा रहे थे साथ ही दोनो घुंडियों को भी मसल रहे थे. मैं मस्ती से भरा मज़ा ले रहा था. तभी पापा ने पूछा, “क्यों बेटे तुमको अच्छा लग रहा है?”
“हाँ पापा बहुत मज़ा आ रहा है.”

“इसी तरह कुछ देर बैठो. आज तुमको बिना शादी के शादी वाला मज़ा देंगे. अब तुम जवान हो गए हो. तुम लेने लायक हो गए हो. आज तुमको ख़ूब मज़ा देंगे.”
“आहह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह ऊऊऊऊऊहह्छ पाआआपाआ.”
“जब मैं इस तरह से तुम्हारी निप्पलों को दबाता हूँ तो तुमको कैसा लगता है” पापा मेरी निप्पलों को निचोड़कर बोले तो मैं उतावला हो बोला, “ पापा ऊह् ससीए इस तरह तो मुझे और भी अच्छा लगता है.”
“जब तुम कपड़े उतरकर नंगे होकर मज़ा लोगे तो और ज़्यादा मज़ा आएगा.”
“पापा चड्डी भी उतार दूं?” मैं अनजान बनकर बोला .
“हाँ बेटे चड्डी भी उतार दो. लड़कों का असली मज़ा तो चड्डी में ही होता है. आज तुमको सारी बात बताएँगे. जब तक तुम्हारी शादी नही होती तब मैं ही तुमको शादी वाला मज़ा दूँगा. तुम्हारे साथ मैं ही सुहागरात मनाऊँगा.तुम्हारी छाती बहुत टाइट है. बेटे नंगे हो जाओ..” पापा कुरते के अंदर हाथ डाल दोनो को दबाते बोले.

जब पापा ने मेरी निप्पलों को मसलते हुए कपड़े उतारने को कहा तो यक़ीन हो गया कि आज पापा के लंड का मज़ा मिलेगा. मैं उनके लंड को खाने की सोच गुदगुदा गया था. मैं मम्मी की रंगीन चुदाई को याद करता कुर्सी से नीचे उतरा और कपड़े उतारने लगा. कपड़े उतार नंगा हो मम्मी की तरह ही पैर फैला कुर्सी पर बैठ गया. मेरा छोटा सा लंड तना था और मुझे ज़रा भी शरम नही लग रही थी.पापा ने मुझे घुमा दिया. मेरी जांघो के बीच रोएदार गांड पापा को साफ़ दिख रही थी. पापा मेरी मस्त गांड को गौर से देख रहे थे. गांड का गुलाबी छेद मस्त था. पापा एक हाथ से मेरी गुलाबी कली को सहलाते बोले, “बेटे तुम्हारी गांड तो जवान हो गयी है.”
“क्या जवान हो गयी है पापा?”
“अरे बेटे तुम्हारी ये मस्त गांड “पापा ने गांड को दबाया. पापा के हाथ से गांड दबाए जाने पर मैं सनसना गया. मैं मस्ती से भरी अपनी गांड को सामने आईने में देख रहा था. तभी पापा ने अपने अंगूठे को क्रीम से चुपद मेरी गांड में  डाला. वो मेरी गांड को क्रीम से चिक्नी कर रहे थे. अंगूठा जाते ही मेरा बदन गंगाना गया. तभी पापा ने गांड से अंगूठा बाहर किया तो उसपर लगे गांड के रस को देख बोले, “हाए बेटे यह क्या है. क्या किसी से चुदवाकर मज़ा लिया है?”
मैं पापा के अनुभव से धक्क से रह गया. मैं घबराकर अनजान बनकर बोला, “कैसा मज़ा पापा”
“बेटे यहाँ कोई आया था?”
“नही पापा यहाँ तो कोई नही आया था.”
“तो फिर तुम्हारी गांड मैं यह गाढ़ा रस कैसा?”
मुझे क्या पता पापा जब आप मेरे निप्पल मसल रहे थे तब कुछ गिरा था शायद.” मैं बहाना बनाता बोला.
पापा समझ तो गए थे पर बोले“लो टावल से साफ़ कर लो.”
पापा मुझे टावल दे निप्पलों को मसलते हुए बोले. पापा से टावल ले अपनी गांड को रगड़ रगड़कर साफ़ किया. मैं गांड मसल्वाते हुए पापा से खुलकर गंदी बाते कर रहा था ताकि सभी कुछ जान सकूँ.
“बेटे जब तुम्हारी निप्पलों को दबाता हूँ तो कैसा लगता है?”
“हाए पापा तब जन्नत जैसा मज़ा मिलता है.”
“बेटे तुम्हारी गांड मैं भी कुछ होता है?”
“हाँ  पापा गुदगुदी हो रही है.” मैं बेशरम होकर बोला.
” ज़रा तुम्हारे लंड को और दबा लूं तो फिर तुम्हारी गांड को भी मज़ा दूं. बेटे किसी को बताना नही ”
“नही पापा बहुत मज़ा है. किसी को नही पता चलेगा.”
पापा मेरे लंड को मसलते रहे और मैं जन्नत का मज़ा लेता रहा. कुछ देर बाद मैं तड़प कर बोला, “ऊओहह्छ पापा अब बंद करो लंड दबाना और अब अपने बेटे की गांड का मज़ा लो.” अब मैं भी पापा के साथ खुलकर बात कर रहा था. इस समय हम दोनों बाप-बेटे पति-पत्नी थे. पापा मेरे लंड को छोड़कर मेरे सामने आए. पापा का मोटा लंड खड़ा होकर मेरी आँख के सामने फूदकने लगा. लंड तो पापा का पहले भी देखा था पर इतनी पास से आज देख रहा था. मेरा मन उसे पकड़ने को ललचाया तो मैने उसे पकड़ लिया और दबाने लगा.पापा के मस्त लंड को देख लार टपकने लगी. मैं पापा के केले को पकड़कर बोला, “श पापा आपका लंड बहुत मोटा है. इतना मोटा मेरी गांड मैं कैसे जाएगा”
“अरे पगली मर्द का लंड ऐसा ही होता है. मोटे से ही तो मज़ा आता है.”
“पर पापा मेरी गांड तो छोटी है.”
“कोई बात नही बेटे . देखना पूरा जाएगा.”
“पर पापा मेरी फ़ट जाएगी.”
“अरे बेटे नही फटेगी.एक बार चुद जाओगे तो रोज़ चुदवाने के लिए तड़प उठेगी.अपने पैर फैलाकर गांड खोलो. पहले अपनी बेटे की गांड चाट लूं,फिर चोदूंगा.”
मैं समझ गया कि पापा मम्मी की तरह मेरी गांड को चाटना चाहते हैं. मैने जब मम्मी को गांड चटवाते देखा था तभी से सोच रहा था कि काश पापा मेरी गांड भी चाटें.जब पापा ने गांड फैलाने के लिए कहा तो मैंने फ़ौरन दोनो हाथ से गांड की दरार को पकड़ कर खोल दिया. पापा घुटने के बल नीचे बैठ गये और मेरी रोएदार गांड पर अपने होंट रख चूमने लगे. पापा के चूमने पर मैं गरमा गया. दो चार बार चूमने के बाद पापा ने अपनी जीभ मेरी गांड के चारो ओर चलाते हुए चाटना शुरू किया. वो मेरे हल्के हल्के बाल भी चाट रहे थे. मुझे ग़ज़ब का मज़ा आ रहा था. मैं मस्त था. उमेश तो बस जल्दी से चोदकर चला गया था. निप्पल और लंड भी नही दबाया था जिससे कुछ मज़ा नही आया था. लेकिन पापा तो चालाक खिलाड़ी की तरह पूरा मज़ा दे रहे थे. पापा ने गांड के बाहर चाट चाटकर गीला कर दिया था.

अब पापा गांड की दरार में जीभ चला रहे थे. कुछ देर तक इसी तरह करने के बाद पापा ने अपनी जीभ मेरी गुलाबी गांड के लस लसाए छेद में पेल दिया. जीभ छेद में गयी तो मेरी हालत खराब हो गयी. मैं मस्ती से तड़प उठा.पहली बार गांड चाटी जा रही थी. इतना मज़ा आया कि मैं गांड उछालने लगा. कुछ देर बाद पापा अलग हुए और अपने खड़े लंड को मेरी गांड पर लगा लंड से गांड रगड़ने लगे.

गांड की चटाई के बाद लंड की रगड़ाई ने मुझे पागल बना दिया और मैं उतावलेपन से पापा से बोला, “पापा अब पेल भी दो मेरी गांड में… आअहह्ह्ह ऊऊहह्छ.”
पापा ने मेरी तड़पती आवाज़ पर मेरी टांगों को पकड़कर कमर को उठाकर धक्का मारा तो करारा शॉट लगने पर पापा का आधा लंड मेरी गांड में धंस गया. पापा का मोटा और लंबा लंड मेरी छोटी गांड को ककड़ी की तरह चीरकर घुसा था. आधा जाते ही मैं दर्द से तड़पकर बोला, “आआाहह्ह्ह्ह्ह ठऊऊईई ममम्म्माररर्र गया पापा. धीरे धीरे पापा बहुत मोटा है पापा गांड फ़ट गयी.”
पापा का मोटा और लंबा लंड मेरी गांड में कसा था. मेरे कराहने पर पापा ने धक्के मारना बंद कर मेरे लंड को मसलना शुरू किया. अब मज़ा आने लगा. 6-7 मिनिट बाद दर्द ख़तम हो गया. अब पापा बिना रुके धक्के लगा रहे थे. धीरे धीरे पापा का पूरा लंड मेरी गांड को फाड़ता हुआ घुस गया. मैं दर्द से छटपटाने लगा. ऐसा लगा जैसे गांड में चाकू(नाइफ) ठसा है. मैं कमर झटकते बोला, “पापा मेरी फ़ट गयी. निकालो मुझे नही चुदवाना .”
पापा अपना लंड पेलते हुए मेरे गाल चाट रहे थे. पापा मेरे गाल चाट बोले, “बेटे रो मत अब तो पूरा चला गया. हर लड़के को पहली बार दर्द होता है फिर मज़ा आता है.”
कुछ देर बाद मेरा कराहना बंद हुआ तो पापा धीरे धीरे चोदने लगे. पापा का कसा कसा आ जा रहा था. अब सच ही मज़ा आ रहा था. अब जब पापा ऊपर से धक्का लगते तो मैं नीचे से गांड उच्चलता. उमेश तो केवल ऊपर से रगड़कर चला गया था. असली चुदाई तो पापा कर रहे थे. पापा ने पूरा अंदर तक पेल दिया था. पापा का लंड उमेश से बहुत मज़ेदार था. जब पापा शॉट लगते तो सूपड़ा मेरे प्रोस्टेट तक जाता. मुझे जन्नत के मज़े से भी ज्यादा मज़ा मिल रहा था. तभी पापा ने पूछा “बेटे अब दर्द तो नही हो रही है?”
“हाए पापा अब तो बहुत मज़ा आ रहा है. आअहह्छ पापा और ज़ोर ज़ोर से चोदो ”
पापा इसी तरह 20 मिनिट तक चोदते रहे. 20 मिनिट बाद पापा के लंड से गरम गरम मलाईदार पानी मेरी गांड में गिरने लगा. जब पापा का पानी मेरी गांड में गिरा तो मैं पापा से चिपक गया और मेरा लंड भी फनफना कर झड़ने लगा.हम दोनों साथ ही झड़ रहे थे.
पापा ने फिर मुझे रात भर चोदा. सुबह 12 बजे सोकर उठे तो मैने पापा से कहा, “पापा आज फिर चोदोगे?”
“अरे मेरी जान अब मैं बेटाचोद बन गया हूँ.अब तो तुझे रोज़ ही चोदूंगा.अब तो मेरी दूसरी बीवी है ”
“पर पापा जब मम्मी आ जाएँगी तो ?”
“अरे मेरी जान उसे तो बस एक बार चोद दूँगा और वो ठंडी हो जाएगी. फिर तेरे कमरे में आ जाया करूँगा. ”
मैं फिर पापा के साथ रोज़ सुहागरात मनाने लगा.

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